SIR विवाद में डीके शिवकुमार का बड़ा बयान, CEC ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने की मांग

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मतदाता सूची का दोबारा सत्यापन कराने की बात कही। कांग्रेस ने बेंगलुरु में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।

By  Preeti Kamal September 26th 2026 03:20 PM -- Updated: September 26th 2026 02:35 PM

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उनकी गिरफ्तारी और पद से हटाने की बात कही। उन्होंने मतदाता सूची की दोबारा जांच की मांग भी उठाई। शिवकुमार ने कहा, “मुख्य चुनाव अधिकारी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और बर्खास्त किया जाना चाहिए। दोबारा सत्यापन होना चाहिए।” उनका यह बयान बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कर्नाटक कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान आया।

कर्नाटक कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर बेंगलुरु में प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और लोगों के मताधिकार की रक्षा के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। राव ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार पर लोगों का विश्वास नहीं है तो उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए या उन्हें स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख की भी आलोचना की और न्यायाधीशों से आत्ममंथन करने की बात कही।

एचके पाटिल बोले- CEC तुरंत पद छोड़ें

कर्नाटक के पूर्व मंत्री एचके पाटिल ने भी CEC के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार कानून के शासन और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का यह विरोध ऐसे समय में हुआ है जब SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। शिवकुमार पहले भी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया को नए सिरे से कराने की मांग कर चुके हैं।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनावी सूची और संबंधित प्रक्रियाओं से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने तथा पश्चिम बंगाल में अपील दाखिल करने जैसे मुद्दों पर मतभेद का उल्लेख किया गया था।

शिवकुमार ने इन्हीं रिपोर्टों के संदर्भ में पहले कहा था कि यदि आयोग के भीतर दो सदस्य किसी निर्णय से असहमत हैं, तो इस तरह के मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने SIR को नए सिरे से कराने और चुनावी आंकड़ों की व्यापक समीक्षा की मांग की थी।

कर्नाटक में 41 लाख से ज्यादा SIR नोटिस

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 41.63 लाख नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। शिवकुमार ने कहा है कि SIR की प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है, लेकिन पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री का कहना है कि सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और मतदाता आंकड़ों की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

कई राज्यों में कांग्रेस का विरोध

SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के अलावा जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई राज्यों में प्रदर्शन किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के कुछ प्रस्तावित मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी स्थगित किए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन कार्यक्रमों के स्थगन को SIR विवाद से जोड़ने से इनकार किया है और इसे स्थानीय व प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया है।

नंदिनी दूध के दाम पर कैबिनेट में होगी चर्चा

इस बीच कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दूध की कीमत में 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की जा रही है और इस मुद्दे पर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। शिवकुमार ने कहा कि अन्य राज्यों में दूध की कीमतों की जानकारी भी ली जा रही है और किसानों में मौजूदा कीमत को लेकर नाराजगी है। कैबिनेट चर्चा के बाद इस पर आगे फैसला लिया जाएगा। 

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