गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव: BJP का दबदबा कायम, शुरुआती नतीजों में विपक्ष कमजोर...
गुजरात: गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव रिजल्ट आज है। मतदान 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में हुआ, जिनमें कुल 9,200 सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में 4.18 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र थे।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, शहरी निकायों में कच्छ जिले के नवनिर्मित गांधीधाम नगर निगम में सबसे कम 46.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि वलसाड जिले के वापी में सबसे अधिक 72.29 प्रतिशत मतदान हुआ।
भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा
अहमदाबाद नगर निगम में मतदान प्रतिशत 51.81 रहा। ग्रामीण निकायों में आदिवासी बहुल नर्मदा जिले में सर्वाधिक 84.49 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पोरबंदर जिला पंचायत में सबसे कम 50.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। मतदान शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा उत्साह देखा गया
अगर वोटिंग प्रतिशत की बात करें तो इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी इलाकों के मुकाबले ज्यादा उत्साह देखा गया। नगर निगमों में 49.02% मतदान हुआ, जबकि नगर पालिकाओं में 59.50% मतदान दर्ज किया गया। उप-चुनाव वाली नगर निगमों में 55.38%, जिला पंचायतों में 61.69% और तालुका पंचायतों में 62.38% मतदान हुआ, जो ग्रामीण भागीदारी को दर्शाता है।
इन सीटों पर AAP की जीत
अमरेली, गिर सोमनाथ और जामनगर के बाद अब आम आदमी पार्टी ने छोटा उदयपुर जिले में भी एंट्री कर ली है। नस्वाड़ी की बगलिया तालुका पंचायत सीट पर AAP उम्मीदवार सविताबेन भील ने 1,441 वोटों से शानदार जीत हासिल की।
पाटड़ी नगर पालिका में भाजपा का क्लीन स्वीप
सुरेंद्रनगर जिले की पाटड़ी नगर पालिका में भाजपा ने 6 वार्डों की सभी 24 सीटें जीत ली हैं। इनमें से 18 सीटों पर पहले ही उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके थे।
समाजवादी पार्टी को भी मिली सफलता
गुजरात स्थानीय चुनावों में समाजवादी पार्टी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। खेड़ा जिले की काठलाल नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 में पार्टी उम्मीदवार ने जीत हासिल की।
कांग्रेस की वापसी
राजकोट के वार्ड नंबर 16 में कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। गौरतलब है कि पिछली बार इस वार्ड में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार पार्टी ने वापसी की है। जैसे-जैसे नतीजे सामने आएंगे, यह साफ होगा कि किस पार्टी का दबदबा सबसे ज्यादा रहा।