कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक, अब राम मंदिर ट्रस्ट की कमान; जानिए कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया CEO चुना गया है। करीब चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर और बाद में ऑपरेशन सिंदूर में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
अयोध्या के श्री राम मंदिर से जुड़े श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने नए CEO के नाम का ऐलान कर दिया है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बुधवार को हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में उनके नाम पर फैसला लिया गया। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा हाल ही में वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और कमांड जिम्मेदारियां संभालीं।
उनका करीब चार दशक लंबा सैन्य करियर रहा है, जिसमें लड़ाकू विमानों की उड़ान से लेकर उच्च स्तर की रणनीतिक योजना और कमांड तक का अनुभव शामिल रहा। अब वह इसी अनुभव के साथ राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे।
कारगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा का नाम भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों से जुड़ा रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर में अहम भूमिका निभाई थी।
उस समय वह स्क्वाड्रन लीडर के पद पर थे। उनके करियर की खास उपलब्धियों में से एक कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने वाली टीम का हिस्सा होना था।
इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमलों में किया गया। इनमें टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे इलाके शामिल थे।
मिराज-2000 की सटीक स्ट्राइक क्षमता ने कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जितेंद्र मिश्रा उस दौर में इस ऑपरेशनल क्षमता को विकसित करने वाली टीम से जुड़े थे।
40 साल का शानदार फ्लाइंग करियर
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था। इसके बाद उन्होंने करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवा की।
उनके पास 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए।
वायुसेना में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। इनमें Aircraft and Systems Testing Establishment में Chief Test Pilot और एयर हेडक्वार्टर में Operations Planning and Assessment Group के Director जैसे पद शामिल हैं।
इस तरह उनका अनुभव केवल ऑपरेशनल उड़ानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परीक्षण, रणनीतिक योजना और सैन्य संचालन के क्षेत्रों में भी रहा।
ऑपरेशन सिंदूर में क्या थी भूमिका?
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय ऑपरेशन सिंदूर रहा। एयर मार्शल की रैंक पर प्रमोशन के बाद उन्हें 9 जनवरी 2023 को डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर नियुक्त किया गया था।
इसके बाद 5 दिसंबर 2023 को उन्हें Integrated Defence Staff (Operations) में Deputy Chief बनाया गया।
बाद में 1 जनवरी 2025 को उन्हें वायुसेना की Western Command का Commander-in-Chief नियुक्त किया गया। पश्चिमी कमान पाकिस्तान से लगी सीमा की सुरक्षा और संबंधित सैन्य अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उस दौरान पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के पास थी।
S-400 को लेकर क्या बताया था?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दिए गए एक इंटरव्यू में जितेंद्र मिश्रा ने अभियान के दौरान पाकिस्तान की ओर से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की लोकेशन का पता लगाने की कोशिशों का जिक्र किया था।
उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान भारतीय S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था। उनके मुताबिक, इसमें दूसरे देशों से मिलने वाली सैटेलाइट संबंधी जानकारी के साथ भारत के भीतर जासूसी नेटवर्क और स्लीपर सेल को सक्रिय करने की कोशिश भी शामिल थी।
उन्होंने यह भी बताया था कि पाकिस्तान के लिए S-400 एक बड़ी चुनौती था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की मौजूदगी के कारण पाकिस्तानी विमानों के लिए भारतीय क्षेत्र में कार्रवाई करना जोखिम भरा था।
314 किलोमीटर दूर लक्ष्य को मार गिराने का दावा
जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए S-400 सिस्टम की कार्रवाई का भी उल्लेख किया था।
उनके मुताबिक, पाकिस्तानी पक्ष भारतीय अभियानों की निगरानी के लिए एयरबोर्न रडार का इस्तेमाल कर सकता था। उन्होंने बताया था कि एक समय S-400 ऑपरेटर ने आने वाले लक्ष्य पर कार्रवाई की अनुमति मांगी।
मिश्रा के अनुसार, उन्होंने ऑपरेटर को कार्रवाई की अनुमति दी और लक्ष्य को 314 किलोमीटर की दूरी पर मार गिराया गया। यह विवरण उनके इंटरव्यू में दिए गए बयान पर आधारित है।
इन सैन्य सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं
जितेंद्र मिश्रा की सैन्य सेवाओं को कई बड़े सम्मानों से मान्यता मिल चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
इससे पहले उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भी प्रदान किया गया था।
इन सम्मानों के अलावा उनके लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियां शामिल रहीं।
अब राम मंदिर ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी
वायुसेना से रिटायरमेंट के बाद जितेंद्र मिश्रा के सामने अब एक बिल्कुल अलग तरह की जिम्मेदारी है। राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में उन्हें मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और संस्थागत कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार हुआ है। ऐसे में ट्रस्ट के कामकाज में बेहतर प्रबंधन, समन्वय और प्रशासनिक दक्षता की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य जीवन रणनीतिक योजना, नेतृत्व, संचालन और बड़े स्तर की जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। अब देखना होगा कि वह अपने इस अनुभव को राम मंदिर ट्रस्ट की नई भूमिका में किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ट्रस्ट में निर्मला यादव, एम भागचंदका और मदन पांडे को भी नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। यानी ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक साथ कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।