अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के विस्तार के साथ तीन नए सदस्यों को ट्रस्टी की जिम्मेदारी दी गई है। महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव अब ट्रस्ट का हिस्सा होंगे।

तीनों नए ट्रस्टी अलग-अलग क्षेत्रों से आते हैं। महेश भागचंदका दिल्ली के रहने वाले हैं, जबकि मदन मोहन पांडे और निर्मला यादव उत्तर प्रदेश से हैं। मदन मोहन पांडे अयोध्या के रहने वाले हैं, वहीं निर्मला यादव का संबंध शिकोहाबाद से है।

इन तीन नियुक्तियों में सबसे खास बात यह है कि डॉ. निर्मला यादव राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य हैं।

तीनों नए ट्रस्टी ऐसे समय में ट्रस्ट से जुड़े हैं, जब पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। यानी ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक साथ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

कौन हैं महेश भागचंदका?

महेश भागचंदका दिल्ली के रहने वाले हैं और पेशे से व्यवसायी और समाजसेवी हैं। वह विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं। अशोक सिंघल राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं।

68 वर्षीय महेश भागचंदका वर्तमान में अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़े हैं और उसका संचालन करते हैं। राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी रही है।

ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर के भूमि-पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े अनुष्ठानों में उन्होंने सहभागिता की थी।

इसके अलावा वह श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 222 पवित्र तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना से संबंधित कार्य में भी शामिल रहे हैं। वह World Hindu Economic Forum की कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।

इस तरह धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के साथ कारोबारी क्षेत्र का अनुभव रखने वाले भागचंदका को अब राम मंदिर ट्रस्ट में जिम्मेदारी मिली है।

कौन हैं मदन मोहन पांडे?

दूसरे नए ट्रस्टी मदन मोहन पांडे अयोध्या के रहने वाले हैं और पेशे से वकील हैं। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की लंबी कानूनी प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मदन मोहन पांडे 1990 से 2019 के बीच उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाले प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल रहे। राम जन्मभूमि से जुड़े मुकदमों में उन्होंने हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में दलीलें रखीं।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और गवाहियों से संबंधित तर्क अदालत के सामने रखे थे। अदालत से जुड़े रिकॉर्ड में भी उनका नाम रामलला की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं में मिलता है।

मदन मोहन पांडे केवल राम जन्मभूमि मामले की कानूनी पैरवी तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इस पद पर उनका करीब छह साल का कार्यकाल रहा।

अब राम जन्मभूमि से जुड़े लंबे कानूनी अनुभव के बाद उन्हें उसी मंदिर से जुड़े ट्रस्ट में ट्रस्टी की भूमिका मिली है।

कौन हैं डॉ. निर्मला यादव?

तीसरी नई ट्रस्टी डॉ. निर्मला यादव उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की रहने वाली हैं। वह राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य हैं।

66 वर्षीय निर्मला यादव का संबंध शिक्षा के क्षेत्र से रहा है। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में मास्टर डिग्री हासिल की है और वह पीएचडी धारक भी हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव रहा है। उन्होंने करीब 11 वर्षों तक यूनिवर्सिटी प्रिंसिपल के रूप में काम किया। इसके अलावा वह करीब 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य भी रही हैं।

उनका शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के लिए एक अलग तरह की विशेषज्ञता लेकर आता है। महिला सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति भी ट्रस्ट के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।

तीनों की भूमिका क्यों अहम?

राम मंदिर ट्रस्ट में नए सदस्यों को शामिल किए जाने से संगठन में अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव जुड़ा है। महेश भागचंदका धार्मिक-सामाजिक और कारोबारी क्षेत्र से आते हैं। मदन मोहन पांडे के पास राम जन्मभूमि मामले से जुड़ा लंबा कानूनी अनुभव है। वहीं निर्मला यादव शिक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी रही हैं।

ऐसे में तीनों की पृष्ठभूमि एक-दूसरे से अलग है। ट्रस्ट में उनकी भूमिका मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक और संस्थागत कामकाज में महत्वपूर्ण हो सकती है।

इसके साथ ही पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने से ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में सैन्य नेतृत्व और प्रबंधन का अनुभव भी जुड़ा है।

कुल मिलाकर, राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी और नए CEO की नियुक्ति ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव है। अब इन नए सदस्यों के अनुभव का इस्तेमाल मंदिर से जुड़े आगामी कार्यों और व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने में किस तरह किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।