पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग एक पुराने विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। यह टिप्पणी तरनतारन में चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने का आरोप है।
मामले में बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह की शिकायत के बाद कार्रवाई की मांग लंबे समय से चल रही है। अब अनुसूचित जाति आयोग ने सुनवाई के दौरान जांच और कार्रवाई में देरी पर गंभीर चिंता जताई है।
आयोग के रुख के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। राज्य सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि आयोग ने गिरफ्तारी की सिफारिश की है और यदि कानूनी प्रक्रिया के तहत जरूरत हुई तो गिरफ्तारी भी की जाएगी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोग की ओर से कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए गए हैं, जबकि वड़िंग की गिरफ्तारी वास्तव में हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि इस जानकारी में नहीं है।
SC आयोग ने क्यों जताई नाराजगी?
अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह भी मौजूद रहे। आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जांच में देरी, कथित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी और आयोग के सामने कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई।
आयोग ने अधिकारियों से मामले में जल्द कदम उठाने को कहा है और पांच दिन की समय-सीमा दी गई है।
इससे पहले 5 मई 2026 को हुई सुनवाई में भी आयोग ने मामले की जांच तय समय में पूरी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने शिकायतकर्ता सरबजोत सिंह की ओर से कथित धमकी भरे फोन कॉल मिलने की शिकायत को भी गंभीरता से लिया था।
आयोग ने शिकायतकर्ता और उनके आश्रितों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15A के तहत आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही 30 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को देने को कहा गया था।
पंजाब सरकार ने क्या कहा?
मामले पर पंजाब सरकार की ओर से मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि सरकार आयोग के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो गिरफ्तारी भी की जाएगी।
सरकार के इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण हो गया है। पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर राजनीतिक टकराव देखने को मिलता रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ा यह मामला दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है।
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें दलित समुदाय से जुड़े एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कथित टिप्पणी का आरोप है। ऐसे में राजनीतिक दल इस मुद्दे को सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठा सकते हैं।
बूटा सिंह के बेटे ने फैसले का किया स्वागत
सरबजोत सिंह ने अनुसूचित जाति आयोग की ओर से दिए गए निर्देशों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा तय की गई पांच दिन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है और अब आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकारियों को करनी है।
सरबजोत सिंह ने उम्मीद जताई कि आयोग की सिफारिश और निर्देशों के बाद मामले में जल्द और उचित कार्रवाई होगी। उनका कहना है कि वह अब अधिकारियों की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम का इंतजार करेंगे।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पूरे मामले की नजर पांच दिन की समय-सीमा पर है। आयोग के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी और आयोग के सामने रिपोर्ट पेश करनी होगी।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला आने वाले दिनों में गर्म रहने की संभावना है। एक तरफ कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रिया सामने आ सकती है, वहीं पंजाब सरकार अपने रुख को कानूनी प्रक्रिया से जोड़कर देख रही है।
सबसे अहम सवाल यही है कि आयोग के निर्देशों के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में अमरिंदर राजा वड़िंग के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई होती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति आयोग ने देरी पर कड़ा रुख अपनाया है और पांच दिन में कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने को कहा है।
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