चंडीगढ़, पंजाब: पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर छात्र राजनीति में संगठन का दबदबा बरकरार रखा। यह जीत ऐसे समय में हुई है, जब विश्वविद्यालय चुनाव में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ था।
PUCSC चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के गुरमन सिंह सिद्धू, AAP समर्थित ASAP के आदिल बीर सिंह, ABVP के अंकित बिढान और दर्शप्रीत सिंह शामिल थे। मतदान के बाद हुई मतगणना में अंकित बिढान ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए अध्यक्ष पद अपने नाम किया। अंकित बिढान की जीत को ABVP के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। चुनाव के दौरान विभिन्न छात्र संगठनों ने राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीतिक मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया था।
The Verdict is in! Panjab University chooses ABVP yet again!Another mandate. Another massive victory.Thank you, PU. ❤️ pic.twitter.com/rXBRLcFGNK
— ABVP (@ABVPVoice) August 31, 2026
16,500 से ज्यादा छात्रों ने किया मतदान
इस साल PUCSC चुनाव में करीब 16,500 छात्र मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए पात्र थे। अध्यक्ष के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और विभागीय प्रतिनिधियों के पदों के लिए भी चुनाव हुआ। कुल 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें चार उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए मुकाबले में थे। मतदान सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराया गया। मतगणना दोपहर से शुरू हुई।
Panjab University, it’s time to make it official! When you step into the booth today, look for number two.Stamp firmly in front of Ballot No. 2, Ankit Bidhan, and elect him as President of the PUCSC. Fold it, drop it in the box, and lock in the win.Ankit Bidhan I Ballot No.… pic.twitter.com/XhpsUGnxmn
— ABVP Punjab (@ABVPPunjab) August 31, 2026
SOI ने दिया था ABVP को समर्थन
चुनाव से ठीक पहले इस मुकाबले में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आया था। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के छात्र संगठन Student Organisation of India (SOI) ने ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिढान को समर्थन देने का ऐलान किया था। SOI के अपने उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद संगठन ने ABVP उम्मीदवार के समर्थन का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने चुनावी मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया था।
#LATESTUPDATEALL POST - Panjab University Election ResultPRESIDENT Total = After UIET (59th Department)ABVP - ANKIT BIDHAN: 2879 (Lead: 556 over Aadil)ASAP - AADIL BRAR: 2323NSUI - GURMAN SINGH SIDHU: 2034SATH - DARSHPREET SINGH: 1208(ABVP is now very close to…
— Rishu Raj Singh (@rishuraj_chd) August 31, 2026
पिछले साल भी ABVP ने जीता था अध्यक्ष पद
ABVP के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन ने पिछले साल भी PUCSC के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। चुनाव से पहले ABVP ने अंकित बिढान को अपना उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा था कि संगठन छात्र हितों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देगा। अंकित बिढान 2021 से ABVP से जुड़े हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के विधि विभाग से कानून की पढ़ाई की और बाद में Centre for the Study of Social Inclusion में शोधार्थी के रूप में दाखिला लिया।
चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप भी रहे चर्चा में
PUCSC चुनाव से पहले छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले। AAP समर्थित ASAP ने कथित धमकी और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए थे, जबकि ABVP ने इन आरोपों को खारिज किया था। इससे पहले नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी विवाद सामने आया था। SOI के उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद संगठन ने विरोध जताया था। वहीं, अंकित बिढान के नामांकन पर भी आपत्ति उठाई गई थी।
विश्वविद्यालय ने चुनाव को लेकर जारी की थी एडवाइजरी
पंजाब यूनिवर्सिटी ने चुनाव से पहले छात्रों के लिए आधिकारिक एडवाइजरी भी जारी की थी। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और छात्रावासों की आधिकारिक नोटिस बोर्ड पर PUCSC चुनाव 2026 से संबंधित सूचनाएं और दिशा-निर्देश प्रकाशित किए गए थे।
छात्र राजनीति में अहम माना जा रहा परिणाम
पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र संघ चुनाव केवल कैंपस राजनीति तक सीमित नहीं माना जाता। यहां सक्रिय छात्र संगठन अक्सर राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति से भी जुड़े रहते हैं। ऐसे में ABVP की लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत को संगठन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव परिणामों को सीधे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव का जनादेश मानना उचित नहीं होगा। लेकिन छात्र राजनीति में विभिन्न संगठनों के बीच बने समीकरण आने वाले समय में राजनीतिक चर्चाओं का विषय जरूर रहेंगे।
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