नई दिल्ली: दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में 10 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत के बाद हंगामा हो गया। छात्रा के परिजनों ने एक शिक्षिका पर उसे किताब नहीं लाने के कारण कथित तौर पर प्रताड़ित और दंडित करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि छात्रा स्कूल में किताब नहीं लाई थी, जिसके बाद शिक्षिका ने उसे कथित तौर पर सजा दी। परिवार के मुताबिक, छात्रा को धूप में खड़ा रहने के लिए मजबूर किया गया।
परिजनों का दावा है कि इसके बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, छात्रा की मौत के वास्तविक कारण और शिक्षिका द्वारा कथित रूप से दिए गए दंड के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्कूल के बाहर परिजनों का प्रदर्शन
घटना से नाराज छात्रा के रिश्तेदारों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रा के साथ स्कूल में जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
Delhi: A 10-year-old student of a Sarvodaya Kanya Vidyalaya in East Vinod Nagar died during treatment, with her family alleging that she was tortured and punished by a teacher for not bringing a book. The family claimed she was made to stand in the sun and later fell ill.… pic.twitter.com/KBz6fHETMX
— IANS (@ians_india) August 31, 2026
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
छात्रा की मौत के बाद मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में छात्रा के साथ वास्तव में क्या हुआ, उसे किस तरह की सजा दी गई और उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद स्कूल प्रशासन ने क्या कदम उठाए। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय दस्तावेज, स्कूल से जुड़े रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही छात्रा की मौत की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बच्चों को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना गंभीर विषय है। स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार के दंडात्मक या हिंसक व्यवहार पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।
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