गोलगप्पे, पानीपुरी, पुचका या पतासी — नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन इनका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है। सड़क किनारे गोलगप्पे का ठेला देखते ही कई लोग रुक जाते हैं। इसके बाद गोलगप्पे वाला अक्सर एक सवाल पूछता है—“सूजी वाले खाएंगे या आटे वाले?

आमतौर पर लोग अपनी पसंद, कुरकुरेपन या स्वाद के आधार पर इसका जवाब देते हैं। लेकिन अगर बात पोषण की हो तो क्या दोनों विकल्प एक जैसे हैं? अगर आपको इन दोनों में से किसी एक को चुनना हो, तो पूरे गेहूं के आटे से बनी पुरी को थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आटे वाले गोलगप्पे हेल्दी फूड बन जाते हैं। गोलगप्पे की पुरी आमतौर पर डीप फ्राई की जाती है। इसलिए इसे खाते समय मात्रा और बाकी सामग्री का भी ध्यान रखना जरूरी है।

आटे वाले गोलगप्पे क्यों हो सकते हैं बेहतर?

सूजी और आटे से बनी पुरी के बीच सबसे अहम अंतर उनके पोषण से जुड़ा है। अगर गोलगप्पे पूरे गेहूं के आटे से तैयार किए गए हैं, तो उनमें सूजी की तुलना में फाइबर अधिक हो सकता है।

फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। इसके मुकाबले रिफाइंड सूजी अपेक्षाकृत जल्दी पच सकती है। यही वजह है कि पोषण के नजरिए से पूरे गेहूं के आटे से बनी पुरी को सूजी वाली पुरी पर थोड़ी प्राथमिकता दी जा सकती है।

इसके अलावा, पूरे गेहूं के आटे में कुछ विटामिन, मिनरल्स और अन्य प्लांट कंपाउंड्स भी मिल सकते हैं। हालांकि, इन दोनों के बीच अंतर को इतना बड़ा नहीं माना जाना चाहिए कि गोलगप्पे को संपूर्ण या हेल्दी मील समझ लिया जाए।

क्या सूजी वाले गोलगप्पे बिल्कुल नहीं खाने चाहिए?

ऐसा नहीं है। अगर आपको सूजी वाले गोलगप्पे ज्यादा पसंद हैं तो कभी-कभार इन्हें खाया जा सकता है। सूजी की पुरी अपनी कुरकुरी और क्रिस्पी टेक्सचर के लिए काफी पसंद की जाती है।

लेकिन यहां एक और बात ध्यान देने वाली है। पुरी को डीप फ्राई किया जाता है और इससे खाने में तेल की मात्रा बढ़ती है। उपलब्ध एक्सपर्ट जानकारी के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में सूजी की पुरी ज्यादा तेल सोख सकती है, जिससे उसमें फैट की मात्रा बढ़ सकती है।

फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि सूजी और आटे दोनों की पुरी तली हुई होती हैं। इसलिए केवल आटे वाली पुरी चुन लेने से गोलगप्पे पूरी तरह हेल्दी स्नैक नहीं बन जाते।

गोलगप्पे की पूरी प्लेट का पोषण भी मायने रखता है

जब हम गोलगप्पे खाते हैं तो सिर्फ पुरी नहीं खाते। उसके अंदर आलू या दूसरी फिलिंग, मसाले, नमक, मीठी चटनी और पानी भी होता है। इसलिए पूरी प्लेट का पोषण केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि पुरी सूजी की है या आटे की।

अगर आप थोड़ा बेहतर विकल्प चाहते हैं तो गोलगप्पे की फिलिंग पर भी ध्यान दिया जा सकता है। चना या स्प्राउट्स जैसी चीजों को शामिल करने से स्नैक में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाया जा सकता है। इससे सिर्फ आलू पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

अगली बार गोलगप्पे वाले से क्या कहें?

अगर आपके सामने दो विकल्प हैं और एक पुरी पूरे गेहूं के आटे से बनी है, जबकि दूसरी रिफाइंड सूजी से, तो पोषण के लिहाज से आटे वाली पुरी चुनना थोड़ा बेहतर फैसला हो सकता है।

लेकिन असली बात यहां मात्रा की है। आटे की पुरी चुनने के बाद भी अगर आप बहुत ज्यादा गोलगप्पे खा लेते हैं तो इसका फायदा सीमित हो जाएगा। इसलिए इसे कभी-कभार और सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।

साथ ही, गोलगप्पे खाते समय साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। खासकर सड़क किनारे मिलने वाले पानी और सामग्री की स्वच्छता महत्वपूर्ण है।

ये बात हमेशा याद रखें

गोलगप्पे स्वाद के लिए खाए जाने वाला स्नैक हैं, इन्हें रोजाना के संतुलित भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप वजन, ब्लड शुगर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण अपनी डाइट को लेकर विशेष सावधानी बरत रहे हैं, तो व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से संपर्क करना बेहतर है।

सूजी और आटे के गोलगप्पों में चुनाव करना हो तो पूरे गेहूं के आटे वाले गोलगप्पे को थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है, खासकर फाइबर के नजरिए से। लेकिन दोनों ही डीप फ्राई होते हैं, इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है—कम मात्रा, बेहतर फिलिंग और साफ-सफाई का ध्यान।

Disclaimer

अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी एवं विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। स्वास्थ्य या डाइट से जुड़ा कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें।