नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर) को लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में ‘टोटलाइजर’ (Totaliser) प्रणाली लागू करने की याचिका पर केंद्र सरकार से उसका पक्ष पूछा। अदालत ने केंद्र से यह देखने को कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने में कानूनी और व्यावहारिक बाधाएं क्या हैं? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ बूथवार वोटों की गिनती के बजाय पूरे निर्वाचन क्षेत्र के वोटों को एक साथ मिलाकर परिणाम घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
अब सवाल यह है कि आखिर यह टोटलाइजर प्रणाली है क्या? दरअसल, टोटलाइजर ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अलग-अलग मतदान केंद्रों के वोटों को बूथवार सार्वजनिक करने के बजाय कई मतदान केंद्रों के वोटों को एक साथ मिलाकर गिना जाता है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का तर्क है कि इससे किसी खास बूथ के मतदाताओं के मतदान पैटर्न का पता लगाना मुश्किल होगा। इससे मतदाताओं की गोपनीयता सुरक्षित रखने के साथ-साथ चुनाव से पहले डराने-धमकाने और चुनाव के बाद उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
Supreme Court has sought the Centre’s response to a batch of pleas seeking the introduction of a totaliser system for ballot polls to prevent post-poll violence and victimisation of voters during elections. pic.twitter.com/KHdpSScUHo
— ANI (@ANI) September 1, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से टोटलाइजर लागू करने को लेकर केंद्र का पक्ष जानना चाहा। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि इसके लिए कौन-कौन से कानूनी संशोधन आवश्यक होंगे और इसके क्रियान्वयन में क्या कानूनी अड़चनें हैं? अदालत ने केंद्र सरकार से इस विषय पर विचार करने को कहा।
ECI ने बताया- कानून में बदलाव और राजनीतिक सहमति जरूरी
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि टोटलाइजर लागू करने के लिए विधायी संशोधन के साथ राजनीतिक सहमति भी आवश्यक होगी। उन्होंने अदालत को बताया कि मौजूदा समय में EVM की विश्वसनीयता को लेकर सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में बिना स्पष्ट कानूनी आधार वाले नए तंत्र को लागू करना उचित नहीं होगा। ECI ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में संसद या केंद्र सरकार टोटलाइजर प्रणाली लागू करने पर विचार करती है, तो इसके लिए आवश्यक विधायी और नीतिगत बदलाव करने होंगे तथा ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य निर्देशों का लगातार पालन सुनिश्चित हो सके।
याचिकाकर्ता ने 2018 के ECI रुख का दिया हवाला
अश्विनी उपाध्याय ने सुनवाई के दौरान मतदाताओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए टोटलाइजर की जरूरत बताई। उन्होंने निर्वाचन आयोग के पूर्व रुख का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 12 जनवरी 2018 के आदेश पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निर्वाचन आयोग का रुख उसके 2018 के रुख से अलग दिखाई देता है।
बूथवार वोटिंग पैटर्न छिपाने में मदद का दावा
याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में EVM के वोट बूथवार गिने जाते हैं, जिससे किसी मतदान केंद्र पर किस पक्ष को कितना समर्थन मिला, इसका पैटर्न सामने आ सकता है। प्रस्तावित टोटलाइजर प्रणाली में कई बूथों के वोटों को एक साथ मिलाकर गिनने से यह पैटर्न छिपाया जा सकेगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे मतदाताओं को चुनाव से पहले दबाव और चुनाव के बाद संभावित हिंसा या उत्पीड़न से सुरक्षा मिल सकती है।
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