नई दिल्ली: बेंगलुरु के Al-Hind ISIS आतंकी साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने आरोपी सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान को दोषी ठहराते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 48,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। NIA ने रविवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

NIA के मुताबिक, मामले की शुरुआत 10 जनवरी 2020 को बेंगलुरु में कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज केस से हुई थी। इसके बाद 23 जनवरी 2020 को NIA ने जांच अपने हाथ में लेते हुए मामले को दोबारा दर्ज किया। इसे Al-Hind ISIS Case के तौर पर जाना जाता है। जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ तीन आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

मेहबूब पाशा पर साजिश का मास्टरमाइंड होने का आरोप

इससे पहले आरोपी हनीफ खान को भी 14 जुलाई को दोषी ठहराया गया था। उसने अक्टूबर 2025 में शुरू हुई सुनवाई के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। NIA की जांच में सामने आया कि मामले का मुख्य आरोपी मेहबूब पाशा था। एजेंसी के अनुसार, उसने बेंगलुरु के गुरप्पनापाल्या स्थित अपने आवास पर कई बैठकें आयोजित की थीं।

जांच के मुताबिक, इन बैठकों में लक्षित हत्याओं की योजना बनाने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की साजिश पर चर्चा की गई थी। NIA ने आरोप लगाया कि इस साजिश का उद्देश्य प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के एजेंडे को आगे बढ़ाना था।

जंगल कैंप ट्रेनिंग के लिए खरीदे थे सामान

NIA के अनुसार, दोषी सैयद फासिउर रहमान ने साजिश से जुड़ी बैठकों में हिस्सा लिया था। एजेंसी का दावा है कि उसने Al-Hind समूह के सदस्यों की जंगल-कैंप ट्रेनिंग के लिए Decathlon Sports के एक शोरूम से टेंट और चाकू खरीदे थे। जांच एजेंसी ने कहा कि कथित साजिश का अंतिम उद्देश्य ISIS/Daesh के एक ‘विलायत’ यानी प्रांत की स्थापना करना था।

ऑनलाइन हैंडलर की तलाश जारी

NIA ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी उस कथित ऑनलाइन हैंडलर का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिसने आतंकी मॉड्यूल तैयार करने और कथित साजिश को आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी। एजेंसी के मुताबिक, मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और साजिश के विभिन्न पहलुओं की जांच भी जारी है।