नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खड़गे ने कहा कि सरकार को राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। खड़गे ने अपनी चिट्ठी में कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट करते हुए मांग की कि लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाए। उन्होंने राज्यवार लोकसभा सीटों के मौजूदा बंटवारे को भी 25 वर्षों तक यथावत रखने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष खड़गे ने कहा कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को किसी भी प्रस्ताव को संसद के संभावित विशेष सत्र में पेश किए जाने से पहले उसका विस्तार से अध्ययन करने का अवसर मिलना चाहिए। खड़गे ने पत्र में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है और लोकसभा की वर्तमान सीट संख्या तथा राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा वितरण को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखा जाना चाहिए।
Congress President Shri @kharge writes a letter to PM Modi on delimitation, the delay in proroguing the Monsoon Session of Parliament, and the likely special session mentioned by the Union Minister of Parliamentary Affairs in a television interview last evening 👇 pic.twitter.com/UQ3uaj9xrx
— Congress (@INCIndia) August 27, 2026
2029 से महिला आरक्षण लागू करने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन के मुद्दे के साथ-साथ लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2029 से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। खड़गे ने सरकार से आग्रह किया कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जाए और सभी संबंधित पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर दिया जाए।
किरेन रिजिजू के बयान का हवाला
खड़गे ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के एक टेलीविजन इंटरव्यू में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना संबंधी टिप्पणी का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि सरकार आगे बढ़ने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाए और परिसीमन के संभावित प्रस्तावों पर राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को पर्याप्त समय दिया जाए। खड़गे ने परिसीमन को देश के लिए “बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा” बताते हुए कहा कि पर्याप्त विचार-विमर्श और परामर्श के बिना प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
परिसीमन को लेकर क्यों है विवाद?
परिसीमन का संबंध जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व के पुनर्निर्धारण से है। इस मुद्दे पर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच राजनीतिक बहस तेज है। दक्षिणी राज्यों की चिंता है कि जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद, भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
वहीं, विपक्षी दलों का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे राज्यों को उनके प्रदर्शन के कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए। इसी कारण कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लोकसभा की मौजूदा सीट संख्या और राज्यवार वितरण को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
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