काठमांडू, नई दिल्ली: नेपाल और तिब्बत से सटे हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और बढ़ते प्राकृतिक आपदा जोखिमों को सामने ला दिया है। नेपाल में इस आपदा से अब तक 177 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं।
नेपाल पुलिस के अनुसार, गुरुवार को 12 और शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 177 हो गई। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। यह त्रासदी पिछले 12 वर्षों में हिमालयी क्षेत्र में आई बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियर झील फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की लंबी श्रृंखला की ताजा कड़ी है। विशेषज्ञों ने ऐसे खतरों को जलवायु परिवर्तन, नाजुक पर्वतीय भूगोल और तेजी से हो रहे विकास कार्यों से जोड़ते हुए चिंता जताई है।
1. अगस्त 2025: उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन
अगस्त 2025 में उत्तराखंड के कई हिस्सों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए गए थे। तेज बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे सड़क संपर्क और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
2. सितंबर 2024: नेपाल में भारी बारिश से बाढ़
सितंबर 2024 में नेपाल में लगातार और भारी बारिश के कारण व्यापक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी। इस आपदा में कम से कम 66 लोगों की मौत हुई थी। कई इलाकों में सड़कें, मकान और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ था, जबकि राहत एवं बचाव दलों को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
3. नवंबर 2023: उत्तरकाशी सिलक्यारा सुरंग हादसा
नवंबर 2023 में उत्तराखंड में निर्माणाधीन सड़क सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था, जिसमें 41 श्रमिक फंस गए थे। कई दिनों तक चले जटिल बचाव अभियान के बाद सभी श्रमिकों को 17 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों और कमजोर भूगर्भीय परिस्थितियों को लेकर बहस तेज कर दी थी।
4. अक्टूबर 2023: सिक्किम में ग्लेशियर झील फटने से तबाही
अक्टूबर 2023 में सिक्किम में ग्लेशियर झील फटने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की स्थिति पैदा हुई। भारी बारिश और जलप्रवाह के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आई। इस आपदा में 179 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई और राज्य के कई हिस्सों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
5. जनवरी 2023: जोशीमठ भू-धंसाव संकट
जनवरी 2023 में उत्तराखंड के जोशीमठ में सैकड़ों इमारतों में दरारें आने के बाद गंभीर संकट पैदा हो गया। करीब 200 लोगों को घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। कई इमारतों को असुरक्षित घोषित कर बाद में ध्वस्त करना पड़ा। भूवैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों ने लंबे समय से तेजी से हो रहे निर्माण और नाजुक पर्वतीय भूमि पर उसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।
6. अक्टूबर 2021: उत्तराखंड में बेमौसम बारिश से बाढ़
अक्टूबर 2021 में असामान्य और भारी बारिश के कारण उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई। कई सड़कें और पुल बह गए, जबकि कम से कम 46 लोगों की मौत हुई थी। लगातार बारिश ने चारधाम और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी जनजीवन को प्रभावित किया था।
7. फरवरी 2021: धौलीगंगा घाटी में विनाशकारी फ्लैश फ्लड
फरवरी 2021 में उत्तराखंड की धौलीगंगा नदी घाटी में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।बाढ़ के साथ पानी, चट्टानों और भारी मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया और दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।
2014: कश्मीर की विनाशकारी बाढ़
सितंबर 2014 में असामान्य रूप से भारी बारिश के बाद झेलम नदी उफान पर आ गई। कश्मीर क्षेत्र में पांच दशकों की सबसे भीषण बाढ़ में भारत में करीब 200 लोगों की मौत हुई, जबकि पाकिस्तान में 264 लोगों के मारे जाने की सूचना थी। झेलम नदी का बढ़ता जलस्तर सीमा के दोनों ओर बड़े पैमाने पर बाढ़ का कारण बना था।
नेपाल की ताजा त्रासदी: कैसे आई विनाशकारी बाढ़?
नेपाल में बुधवार को आई फ्लैश फ्लड ने रासुवा समेत कई जिलों में व्यापक तबाही मचाई। नेपाल के रासुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी समेत कई जिलों में मौतों की सूचना है। चितवन, जो जंगल सफारी और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, उन क्षेत्रों में शामिल है जहां बाढ़ का खतरा बढ़ने के बाद अलर्ट जारी किया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ल्हेंडे नदी, जो भोटेकोशी नदी की एक सहायक नदी है, में हिमस्खलन या भारी मलबे के कारण जलप्रवाह बाधित हुआ। इसके बाद पानी और मलबे का तेज सैलाब रासुवागढ़ी सीमा के पास स्थित तिमुरे क्षेत्र की ओर बढ़ा और बड़े पैमाने पर तबाही हुई। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Shisir Khanal) ने कहा कि करीब 300 भारतीय पर्यटक भी लापता बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों के घर प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं और आपदा के वास्तविक नुकसान का आकलन अभी जारी है।
हिमालय में क्यों बढ़ रहा है आपदा का खतरा?
हिमालय दुनिया के सबसे युवा और भूगर्भीय रूप से संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में से एक है। यहां भूस्खलन, अचानक बाढ़, ग्लेशियर झीलों के फटने और हिमस्खलन जैसी घटनाओं का जोखिम बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, अनियमित और अत्यधिक वर्षा, ग्लेशियरों में बदलाव, नाजुक भूगर्भीय संरचना और बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्य इन जोखिमों को और जटिल बना सकते हैं।
नेपाल की ताजा आपदा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विस्तार के दौरान पर्यावरणीय और भूगर्भीय जोखिमों को किस तरह बेहतर तरीके से ध्यान में रखा जाए।
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