काठमांडू, नेपाल: नेपाल में भोटे कोशी नदी में आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल दूतावास के सूत्रों के अनुसार, अब तक 175 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि स्थानीय लोगों और विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। ताजा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 28 देशों के 476 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है।
हालांकि, अधिकारियों ने कहा है कि खोज और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है और आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभावित रासुवा जिले में लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
175 dead, 476 foreigners missing in flash floods as rescue operations intensify: Nepal embassy sourcesRead @ANI Story |https://t.co/qHvwSxYizg#nepalflood #bhotekoshidisaster #nepalfloodrelief pic.twitter.com/BwVPGv4V6j
— ANI Digital (@ani_digital) August 27, 2026
आपदा प्रभावित क्षेत्र में कई जवान संपर्क से बाहर
आपदा प्रभावित क्षेत्र में तैनात नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 जवान भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं।नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 579 यात्री अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 466 विदेशी नागरिक और 113 नेपाली शामिल हैं। वहीं, रासुवा के तिमुरे से अब तक 123 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के धंसने से आई तबाही
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रासुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ल्हेंडे खोला (Lhende Khola) क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के ढहने के बाद मलबे से भरी भीषण बाढ़ आई। तिब्बत की ओर से निकला पानी और मलबा भोटे कोशी नदी में पहुंचा और फिर रासुवागढ़ी, तिमुरे और स्याफ्रू बेसी जैसे इलाकों में भारी तबाही मचाते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। बाढ़ का असर रासुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में भी देखा गया है।
पुल, सड़कें और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त
इस आपदा में अब तक 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। अधिकारियों ने कहा है कि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है। नेपाल सरकार ने खोज, बचाव और राहत अभियान को बड़े स्तर पर तेज कर दिया है। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। सेना और निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहतकर्मियों ने रातभर अभियान चलाकर तिमुरे और स्याफ्रूबेसी क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया।
Embassy Expresses Gratitude for Solidarity Following the Flash Floods in NepalNepal was struck by a devastating flash flood on 26 August 2026, causing tragic loss of lives, injuries, displacement and extensive damage to settlements, roads, bridges and other critical…
— Nepal Embassy, India (@EONIndia) August 27, 2026
घायलों के इलाज के लिए मेडिकल टीमें तैनात
जिला अस्पतालों से लेकर काठमांडू के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों तक मेडिकल टीमों को सक्रिय किया गया है। प्रभावित लोगों के लिए नेपाल सेना के बैरकों में अस्थायी आश्रय, भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं की व्यवस्था की गई है। नेपाल सरकार का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता लोगों की जान बचाने, लापता लोगों की तलाश, सुरक्षित निकासी और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है। जरूरत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए आधिकारिक माध्यमों से जानकारी साझा की जाएगी।
भारत ने भेजी 10 टन मानवीय सहायता
आपदा के बाद भारत ने नेपाल को तत्काल मानवीय सहायता भेजी है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड्ग राज पौडेल को 10 टन राहत सामग्री सौंपी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर इस त्रासदी पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है तथा हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति काठमांडू पहुंच चुकी है तथा दोनों देशों के बीच राहत कार्यों को लेकर समन्वय जारी है।
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