चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भगवंत मान सरकार के सामने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। साझा मुलाजिम मोर्चा ने 27 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि करीब 7 लाख कर्मचारी और पेंशनर उनकी मांगों से जुड़े हुए हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस फैसला नहीं लिया तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है। वहीं, पंजाब सरकार ने कर्मचारी नेताओं से बातचीत की पेशकश की है।
27 अगस्त को क्या-क्या रहेगा बंद?
साझा मुलाजिम मोर्चा के आह्वान पर 27 अगस्त को पंजाब में कई सरकारी सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक सिविल सचिवालय, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी परिवहन सेवाएं हड़ताल से प्रभावित रहेंगी। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका आरोप है कि कई मामलों में कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए अदालत का रुख करना पड़ा है।
पुरानी पेंशन और DA सबसे बड़ा मुद्दा
साझा मुलाजिम मोर्चा के संयोजक सुखचैन खैरा के मुताबिक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली और लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का दावा है कि 18 फीसदी DA की किश्तें अभी लंबित हैं।
इसके अलावा कर्मचारी एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (4-9-14) को लागू करने, वेतन विसंगतियां दूर करने और पहले हटाए गए भत्तों को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
ठेके, आउटसोर्स और अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
सरकार ने बातचीत की पेशकश की
हड़ताल के ऐलान के बाद पंजाब सरकार भी सक्रिय हुई है। सरकार की ओर से कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाने की पेशकश की गई है। कर्मचारी नेता सुखचैन खैरा ने बताया कि 7 अगस्त को मुख्यमंत्री के ओएसडी के साथ उनकी बातचीत हुई थी।
उनके मुताबिक सरकार की ओर से 27 अगस्त की तारीख तय की गई थी, जबकि कर्मचारी संगठन इससे पहले बातचीत चाहते थे। कर्मचारी नेताओं ने संकेत दिया है कि अगर मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
विपक्षी दलों का कर्मचारियों को समर्थन
कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को पंजाब में विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि कांग्रेस कर्मचारियों के साथ खड़ी है और विरोध प्रदर्शन में शामिल होगी।
उन्होंने कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को कर्मचारियों के समर्थन में डिप्टी कमिश्नरों को ज्ञापन सौंपने के निर्देश देने की बात कही। वड़िंग ने पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग करते हुए सरकार पर अपने वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया।
वारिस पंजाब दे की ओर से भी हड़ताल और बंद के आह्वान को समर्थन देने की बात कही गई है। वहीं पंजाब बीजेपी ने लंबित DA के भुगतान को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों के आंदोलन का समर्थन किया है।
बीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि लंबित DA को लेकर अदालत पहले ही आदेश दे चुकी है और सरकार को कर्मचारियों का बकाया भुगतान करना चाहिए।
मान सरकार का क्या कहना है?
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने सरकार के कर्मचारी हितैषी कदमों का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने ठेकेदारी व्यवस्था को खत्म करने के लिए विधानसभा में कानून बनाया है।
सौंद के मुताबिक आवश्यक श्रेणी के कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग से कॉन्ट्रैक्चुअल व्यवस्था में लाने की प्रक्रिया भी की जा रही है। हालांकि, पुरानी पेंशन, लंबित DA, 4-9-14 स्कीम और अन्य मांगों पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई व्यापक समाधान सामने नहीं आया है।
चुनाव से पहले सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का बड़ा आंदोलन सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने साफ संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे चुनाव में अपना रुख तय कर सकते हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस, बीजेपी और वारिस पंजाब दे के समर्थन से यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और बड़ा हो गया है।
अब नजर इस बात पर है कि 27 अगस्त की हड़ताल के बाद सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या मान सरकार लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला लेती है।
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