नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक रेस क्लब को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत नहीं मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब को परिसर से बेदखल करने के एस्टेट ऑफिसर के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि क्लब को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन उसने उनका इस्तेमाल नहीं किया।
यह मामला उस जमीन और परिसर से जुड़ा है, जहां दिल्ली रेस क्लब लंबे समय से संचालित होता रहा है। अदालत ने 11 अगस्त 2026 को एस्टेट ऑफिसर की ओर से जारी बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की क्लब की मांग खारिज कर दी। अब मामले की मुख्य अपील पर 26 सितंबर को सुनवाई होगी।
क्लब को पक्ष रखने के पर्याप्त मौके मिले
पटियाला हाउस कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पितांबर दत्त ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि एस्टेट ऑफिसर ने क्लब को जवाब दाखिल करने और अपने पक्ष में सबूत पेश करने के लिए पर्याप्त समय दिया था।
क्लब की ओर से दावा किया गया था कि उसे केंद्र सरकार की ओर से दाखिल याचिका की कॉपी नहीं दी गई और इस वजह से उसे उचित अवसर नहीं मिला। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि 27 अप्रैल 2026 के आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज था कि केंद्र की याचिका की कॉपी क्लब को उपलब्ध कराई गई थी। इस आदेश पर क्लब के सचिव और कानूनी प्रतिनिधि कर्नल एसके बख्शी के हस्ताक्षर भी मौजूद थे।
कोर्ट के मुताबिक, इसके बाद की सुनवाई के दौरान क्लब ने कभी यह शिकायत नहीं की कि उसे दस्तावेज नहीं मिले हैं। ऐसे में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के उल्लंघन का दावा अदालत को मजबूत नहीं लगा।
12 मार्च को दिया गया था परिसर खाली करने का नोटिस
केंद्र सरकार ने पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट की धारा 5 के तहत बेदखली की कार्रवाई शुरू करने से पहले 12 मार्च 2026 को क्लब को नोटिस दिया था। इसमें क्लब को 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करके जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस को सौंपने के लिए कहा गया था।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि क्लब निर्धारित अवधि में परिसर खाली नहीं करता है तो कानून के तहत बेदखली और जमीन का कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके बाद क्लब ने नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने शुरुआती चरण में क्लब को अंतरिम राहत दी थी। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब को बेदखल नहीं किया जाएगा, हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल 2026 को क्लब का मुकदमा निपटा दिया।
इसके बाद मामला एस्टेट ऑफिसर के सामने पहुंचा और क्लब को कारण बताओ नोटिस दिया गया।
लीज खत्म होने के बाद किराया देना पर्याप्त नहीं
क्लब ने अदालत में यह भी दलील दी कि वह लगातार किराया चुका रहा है, इसलिए उसे अनधिकृत कब्जेदार नहीं माना जा सकता। लेकिन अदालत ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि 1994 के बाद केंद्र सरकार की ओर से लीज बढ़ाने या उसके नवीनीकरण से संबंधित कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। सिर्फ लीज की अवधि खत्म होने के बाद किराया देते रहने से लीज अपने आप नवीनीकृत नहीं हो जाती।
कोर्ट ने यह भी माना कि क्लब की ओर से ऐसा कोई मजबूत प्रथमदृष्टया आधार नहीं दिखाया गया है, जिसके आधार पर 11 अगस्त के बेदखली आदेश पर रोक लगाई जा सके।
‘Res Judicata’ की दलील भी खारिज
क्लब ने यह तर्क भी दिया था कि इस मामले में पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, इसलिए दोबारा कार्यवाही नहीं की जा सकती। इसे कानूनी भाषा में ‘रेस ज्यूडिकाटा’ यानी पहले से तय मामले का सिद्धांत बताया गया।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के मुताबिक, मौजूदा कार्रवाई को देखते हुए क्लब के पास तत्काल अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था।
इस फैसले के बाद फिलहाल क्लब को बेदखली आदेश से राहत नहीं मिली है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे मामले पर अंतिम फैसला हो गया है। क्लब की मुख्य अपील पर 26 सितंबर को सुनवाई होनी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी सुनवाई में स्पष्ट होगी।
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