नेपाल इस समय भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए संकट से जूझ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के साथ हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस मुश्किल वक्त में पड़ोसी देश भारत नेपाल की मदद के लिए आगे आया है।
नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने भारत की सहायता की तारीफ करते हुए दोनों देशों के रिश्तों को पारिवारिक बताया। उन्होंने कहा कि भारत मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा रहा है और मौजूदा संकट में भी हरसंभव मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता रहा है। उनके मुताबिक, यह संबंध केवल सामान्य पड़ोसी देशों जैसा नहीं बल्कि परिवार और भाई-बहन की तरह है।
#WATCH | Rasuwa, Nepal: Nisha Mehta, Health Minister, Nepal, says, "The relationship between our country and India has always been like roti-beti (a bond of family). They are always with us — in our good situations as well as in our bad situations. It is like brotherhood,… https://t.co/Ww7fY3GQEh pic.twitter.com/TlGyfdDWHy
— ANI (@ANI) September 2, 2026
शवों की पहचान में भारत कर रहा मदद
बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में मृतकों के शवों का प्रबंधन और उनकी पहचान भी शामिल है। निशा मेहता के मुताबिक, भारत इस काम में नेपाल की सहायता कर रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत की ओर से DNA टेस्टिंग के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी गई है। इसके अलावा DNA प्रबंधन से जुड़ी लैब स्थापित करने में भी भारत सहयोग कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से मिल रही मदद नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की सहायता को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त किया।
राहत शिविरों में रखे जा रहे बचाए गए लोग
बाढ़ प्रभावित इलाकों से जिन लोगों को बचाया गया है, उन्हें अलग-अलग आश्रय केंद्रों में रखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन लोगों की मेडिकल जरूरतों का ध्यान रखने की कोशिश की जा रही है।
निशा मेहता ने बताया कि राहत और बचाव अभियान में नेपाल अकेला नहीं है। पड़ोसी देशों के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं।
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, विभिन्न संस्थाएं मिलकर राहत, बचाव और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ के बाद अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक रसुवा से 45, नुवाकोट से 155, धाडिंग से 59, चितवन से 348, गोरखा से 66, तनहुं से 38, पूर्वी नवलपरासी से 217 और पश्चिमी नवलपरासी से 190 शव बरामद किए गए हैं। भारत से भी 9 शव मिलने की जानकारी दी गई है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिजनों को सौंपा गया है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान बाकी होने के कारण DNA टेस्टिंग और प्रबंधन की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
‘मुश्किल समय में भी साथ खड़े रहते हैं’
नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री ने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की खासियत यह है कि भारत केवल सामान्य परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी नेपाल के साथ खड़ा रहता है।
बाढ़ से प्रभावित नेपाल में इस समय राहत, बचाव, स्वास्थ्य सेवाओं और मृतकों की पहचान का काम एक साथ चल रहा है। ऐसे में भारत की ओर से DNA विशेषज्ञों और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम हिस्सा बनकर सामने आया है।
नेपाल सरकार के सामने अब चुनौती प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश, मृतकों की पहचान और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की है। आने वाले दिनों में राहत अभियान के साथ इन कार्यों को आगे बढ़ाना प्राथमिकता रहेगा।
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