उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) को झटका लगा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने बुधवार को AIMIM से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

इस दौरान कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख इमरान प्रतापगढ़ी मौजूद रहे।

आसिम वकार लंबे समय से AIMIM में सक्रिय थे और उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रमुख चेहरा माने जाते थे। वह राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। ऐसे में चुनाव से पहले उनका पार्टी छोड़ना AIMIM के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

पिछले छह महीने से चल रहा था मतभेद

आसिम वकार के पार्टी छोड़ने की वजह AIMIM नेतृत्व के साथ उनके बढ़ते मतभेद बताए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले करीब छह महीने से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद बढ़ रहे थे।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद वकार ने AIMIM की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा को सत्ता से हटाकर एक सेक्युलर सरकार बनाना जरूरी है। हालांकि, उनका दावा है कि AIMIM में रहते हुए उन्हें पार्टी की जमीनी राजनीति और शीर्ष नेतृत्व के रुख में अंतर महसूस हुआ।

वकार ने आरोप लगाया कि ऊपर से ऐसा दिखाई देता था कि AIMIM भाजपा के खिलाफ लड़ रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी राजनीतिक लड़ाई कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के खिलाफ ज्यादा दिखाई देती थी।

‘ओवैसी और भाजपा मिले हुए हैं’ का लगाया आरोप

कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने असदुद्दीन ओवैसी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी और भाजपा मिले हुए हैं और AIMIM जमीनी स्तर पर भाजपा का मुकाबला नहीं करती।

यह आरोप पूरी तरह वकार के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है। AIMIM नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

वकार ने कहा कि उन्हें पार्टी की ऐसी राजनीति स्वीकार नहीं थी, इसलिए उन्होंने AIMIM छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया।

हुमायूं कबीर पर भी बोले वकार

आसिम वकार ने पश्चिम बंगाल के नेता और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कबीर को लेकर पहले लगाए गए अपने आरोपों को दोहराया।

वकार ने दावा किया कि हुमायूं कबीर को कथित तौर पर 1,100 करोड़ रुपये मिले थे। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस कथित रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कराई जाएगी।

हालांकि, यह दावा भी वकार की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए।

पहले समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं

आसिम वकार का राजनीतिक सफर AIMIM से पहले समाजवादी पार्टी से भी जुड़ा रहा है। बाद में वह ओवैसी की पार्टी में शामिल हुए और उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उन्होंने कई राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा। ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

यूपी चुनाव से पहले कितना असर?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में AIMIM के एक प्रमुख प्रवक्ता का पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को खास तौर पर अल्पसंख्यक राजनीति के मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर, AIMIM को अपने पुराने संगठन और नेतृत्व के साथ चुनावी मैदान में आगे बढ़ना होगा।

हालांकि, वकार के पार्टी छोड़ने का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि यूपी चुनाव से पहले उनके इस्तीफे ने AIMIM और कांग्रेस दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।