NDA में जाएगी शरद पवार की NCP? जयंत पाटिल-विनोद तावड़े की मुलाकात से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

भाजपा महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (शरद गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि दोनों पक्षों ने किसी भी राजनीतिक बातचीत से इनकार किया है।

By  Laxman July 8th 2026 11:41 AM

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर नए समीकरणों की चर्चा के केंद्र में है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इसकी वजह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल के बीच हुई मुलाकात को माना जा रहा है। हालांकि दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को सामान्य और गैर-राजनीतिक बताया है, लेकिन इसके बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि पार्टी प्रमुख शरद पवार ने संभावित राजनीतिक संवाद की जिम्मेदारी जयंत पाटिल को सौंपी है। इसी बीच उनकी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले विनोद तावड़े से मुलाकात ने कई तरह के कयासों को जन्म दिया है।

कॉफी मीटिंग पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक के सिलसिले में मुंबई के एक होटल पहुंचे थे। वहीं उनकी मुलाकात संयोगवश विनोद तावड़े से हुई और दोनों के बीच कॉफी पर सामान्य बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं हुई।

हालांकि विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसी मुलाकातों को पूरी तरह सामान्य मानना आसान नहीं है।

भाजपा ने भी किया खंडन

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा किसी भी तरह से शरद पवार की पार्टी में टूट कराने या उसके सांसदों-विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फिलहाल महाराष्ट्र में किसी नई पार्टी को NDA में शामिल करने की कोई योजना नहीं है।

भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भी मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जब पार्टी नेतृत्व ने स्थिति साफ कर दी है, तो अफवाहों पर विराम लग जाना चाहिए।

सांसदों को लेकर क्यों बढ़ीं चर्चाएं?

हाल के दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं लगातार तेज रही हैं। शिवसेना (उद्धव गुट) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की खबरों के बाद अब एनसीपी (शरद गुट) के सांसदों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

इसी बीच पार्टी सांसद अमोल कोल्हे के एक बयान ने भी राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई प्रस्ताव आता है तो उस पर विचार किया जा सकता है। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।

सुप्रिया सुले ने किया साफ इनकार

एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने पार्टी के NDA में शामिल होने की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें जयंत पाटिल और विनोद तावड़े की बैठक की कोई विशेष जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉर्पोरेट कानूनों से जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति में सभी सदस्य नियमित रूप से मिलते रहते हैं और ऐसी मुलाकातें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

सुले ने दोहराया कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य जनता के मुद्दों को उठाना है और फिलहाल किसी नए राजनीतिक गठबंधन पर कोई चर्चा नहीं हो रही।

सत्ता के साथ जाने की अटकलें

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के कुछ सांसद और विधायक विकास कार्यों और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सत्ता पक्ष के साथ जाने के पक्षधर हो सकते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि यदि गठबंधन की स्थिति बनती है तो केंद्रीय मंत्रिमंडल और महाराष्ट्र सरकार में प्रतिनिधित्व को लेकर बातचीत हो सकती है।

हालांकि इन सभी दावों का पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से खंडन किया है।

कांग्रेस भी रख रही नजर

दूसरी ओर, राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी खबरें सामने आई हैं कि कांग्रेस नेतृत्व महाराष्ट्र में भविष्य की रणनीति पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से राज्य के बदलते राजनीतिक हालात को लेकर राय ली जा रही है। हालांकि इस संबंध में किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

आगे क्या?

महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। भाजपा और एनसीपी (शरद गुट) दोनों ने गठबंधन की खबरों से इनकार किया है, लेकिन जयंत पाटिल और विनोद तावड़े की मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दे दी है। आने वाले दिनों में यदि कोई नया घटनाक्रम सामने आता है, तो राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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