नई दिल्ली: मानसून इस वक्त देश के सबसे सक्रिय दौर में है। पश्चिमी तट से लेकर मध्य भारत और हिमालयी राज्यों तक भारी बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल, देश के लगभग हर हिस्से से जलभराव, भूस्खलन और यातायात ठप होने की खबरें आ रही हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 से 72 घंटे कई राज्यों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बताए हैं।
महाराष्ट्र में हालात सबसे ज़्यादा बिगड़े हैं। मुंबई-पुणे रेल कॉरिडोर के कर्जत-लोनावला घाट सेक्शन में महज़ 24 घंटों में करीब 600 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे कई जगह भूस्खलन हुआ और ट्रेन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। ठाकुरवाड़ी के पास पहला भूस्खलन तीनों रेल लाइनों को प्रभावित कर गया, जबकि मंकी हिल और खंडाला के बीच एक और स्लाइड दर्ज हुई। लोनावला में तो एक ही दिन में 670 मिमी बारिश हुई, जिसे मौसम वैज्ञानिक "हज़ार साल में एक बार" होने वाली घटना बता रहे हैं।
इसका असर सीधा रेल यातायात पर पड़ा, कई मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द हुईं, कई डायवर्ट हुईं और कई को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खोपोली-कुसगांव ‘मिसिंग लिंक’ के पास टनल नंबर-2 के बाहर भूस्खलन के बाद वाहनों की आवाजाही घंटों डायवर्ट रखनी पड़ी। मध्य प्रदेश के रतलाम रेल मंडल पर भी असर पड़ा, जहां मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस समेत कई अहम ट्रेनें प्रभावित हुईं।

मुंबई-पुणे: 670 मिमी बारिश ने तोड़ा रिकॉर्ड, ‘1000 साल में एक बार’ जैसी घटना
मुंबई में पिछले चार दिनों में करीब 588 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। शहर में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी सभी सरकारी, निजी और सिविक स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए, क्योंकि IMD ने मुंबई, कोल्हापुर, सतारा, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बीएमसी ने नागरिकों से ज़रूरी होने पर ही घर से निकलने की अपील की और हेल्पलाइन नंबर 1916 जारी किया। मुंबई और उसके उपनगरों के लिए मंगलवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक "मॉडरेट फ्लैश फ्लड" का जोखिम भी जताया गया था।
नासिक में भी हालात गंभीर हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन एहतियातन बंद कर दिए गए हैं और स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। बारिश थमने के बाद मुंबई के सायन और चेंबूर जैसे फ्लाईओवरों पर अब बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जो हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।
जान-माल का नुकसान: पुणे ज़िले में सोमवार को भारी बारिश ने कई ज़िंदगियां लील लीं। मावल तहसील के पाटण गांव में भूस्खलन और दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की मौत हुई, जबकि दो अन्य लोग अलग-अलग जगहों पर तेज़ पानी के बहाव में बह गए। प्रशासन ने ज़िले में 500 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। पिछले 24 घंटों में अकेले महाराष्ट्र में कम से कम तीन और मौतें दर्ज की गई हैं।

मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी हालात बदतर हैं। लगातार बारिश और जलभराव से कई किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है, और कई वाहन चालक 24 घंटे से ज़्यादा समय से फंसे हुए हैं। राजस्थान से माल लेकर आया एक ट्रक ड्राइवर, जो इसी जाम में फंसा है, बताता है कि सड़क पर न खाने की कोई व्यवस्था है, न सुरक्षा की।
डोडा, जम्मू-कश्मीर: थाथरी में क्लाउडबर्स्ट, बाज़ार और घर मलबे में दबे
जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले के थाथरी इलाके में मंगलवार तड़के करीब 2:30 बजे बादल फटा। इसके बाद आए तेज़ पानी, कीचड़ और मलबे के सैलाब ने रिहायशी इलाकों और मुख्य बाज़ार को अपनी चपेट में ले लिया। तहसीलदार सतीश राणा के मुताबिक शुरुआती आकलन में करीब 10 घर और 25 दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं, कई वाहन बह गए। डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे (NH-244) को भी बंद करना पड़ा है।
#WATCH | Doda, Jammu & Kashmir: Several shops and houses are severely damaged in a flash flood and landslide in Thathri, Doda pic.twitter.com/qXg1uU3WJz
— ANI (@ANI) July 7, 2026
राहत की बात यह है कि उपराज्यपाल कार्यालय और स्थानीय प्रशासन ने अब तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं की है। हालांकि संपत्ति का नुकसान बड़े पैमाने पर हुआ है। उपराज्यपाल ने डिप्टी कमिश्नर से बात कर प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाने और हाईवे बहाली में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले डोडा के भलेसा इलाके और किश्तवाड़ के 540 मेगावाट क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास भी बादल फटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। IMD के मुताबिक डोडा, किश्तवाड़, उधमपुर, रियासी, जम्मू, सांबा और कठुआ में सामान्य से कहीं ज़्यादा बारिश दर्ज हो रही है।

वायनाड, केरल: टनल प्रोजेक्ट के पास भूस्खलन, अब तक 3 की मौत की पुष्टि
केरल के वायनाड ज़िले में मेप्पाडी के कल्लाड़ी इलाके में मीनाक्षी ब्रिज के पास मंगलवार को बड़ा भूस्खलन हुआ। यह जगह मलप्पुरम-वायनाड को जोड़ने वाली अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी टनल रोड परियोजना के निर्माण स्थल के पास है। शुरुआत में पांच लोगों के घायल होने की खबर आई थी, लेकिन ताज़ा पुष्टि के मुताबिक अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। टनल प्रोजेक्ट में काम करने वाले मज़दूरों को ले जाने वाले कई वाहन भी मलबे की चपेट में आए हैं।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने तुरंत आपात बैठक बुलाई और राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार व मंत्री टी. सिद्दीक को घटनास्थल पर भेजा है। एनडीआरएफ, फायर एंड रेस्क्यू सर्विस, पुलिस और ज़िला प्रशासन की टीमें बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। गौरतलब है कि वायनाड वही इलाका है जिसने पिछले साल भी विनाशकारी भूस्खलन की त्रासदी झेली थी, इसलिए इस हादसे ने पूरे इलाके की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है।

हिमाचल-उत्तराखंड: पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा, 12 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में लगातार बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। शिमला नगर निगम के मेयर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि निगम मानसून से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है - निर्माण और पेड़ काटने की गतिविधियां रोकी गई हैं, नालों की सफाई का काम जारी है और चर्च के पास ढही 100 साल पुरानी दीवार को तीन दिन में दोबारा बनाया जाएगा। IMD ने कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और शिमला के लिए ऑरेंज अलर्ट 12 जुलाई तक बढ़ाया है।
गुजरात: सूरत से जूनागढ़ तक जलभराव, मज़दूरों और किसानों पर सबसे ज़्यादा असर
गुजरात में भी भारी बारिश ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सूरत के कड़ोदरा चौकड़ी इलाके में महज़ दो-तीन घंटे की बारिश में सड़कें डूब जाती हैं। इसका सीधा असर श्रमिक अन्नपूर्णा योजना के तहत सिर्फ 5 रुपये में भोजन लेने आने वाले मज़दूरों पर पड़ता है, जो जलभराव के कारण भोजन केंद्र तक पहुंच ही नहीं पाते। योजना संचालक नितिन पटेल के मुताबिक प्रशासन दौरा तो करता है, लेकिन ठोस समाधान नाममात्र का ही होता है।
वापी के गुंजन इलाके में सड़कें नदियों जैसी बन गईं, दुकानों में पानी घुसने से कपड़ा व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। स्थानीय निवासी असाराम का कहना है कि टैक्स देने के बावजूद हर साल यही समस्या दोहराई जाती है और प्रशासन असरदार कदम नहीं उठाता।
जूनागढ़ के पिखोर-मांगरोल रोड पर नौरी नदी का कॉज़वे बह गया, जिससे भटगांव, सुल्तानपुर और सिलधर समेत कई गांवों का संपर्क कट गया है। सरपंच मगनभाई कंसागरा और स्थानीय निवासी अजीतसिंह बबारिया के मुताबिक किसानों की खेतों तक पहुंच बुरी तरह प्रभावित हुई है, बच्चों को स्कूल भेजना और पानी लाना तक मुश्किल हो गया है।
बाकी देश से रिपोर्ट
कटक, ओडिशा - लगातार बारिश से भीषण जलभराव, नगर निगम कमिश्नर किरनदीप कौर सहोटा के मुताबिक ड्रेनेज टीमें तैनात हैं लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान - अगले तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी।
बीरभूम (पश्चिम बंगाल) और कन्नूर (केरल) - दोनों जगह लगातार भारी बारिश से आम जनजीवन प्रभावित।
IMD का पूर्वानुमान: अगले 48-72 घंटे सबसे अहम
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल पूरे देश में सक्रिय है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कई राज्यों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट सक्रिय हैं, कुछ जगहों पर गरज-चमक, तेज़ हवाओं और आकाशीय बिजली की भी चेतावनी है।
पहाड़ी राज्यों में सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई ज़िलों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
राहत की उम्मीद: मौसम एजेंसियों के मुताबिक मुंबई और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में 9 जुलाई (गुरुवार) से बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र पश्चिमी तट की ओर नमी भेजना जारी रख सकता है।
एहतियात बरतें
मौसम विशेषज्ञों की सलाह है कि नदी-नालों के तेज़ बहाव, जलभराव वाले रास्तों और पहाड़ी ढलानों से दूर रहें। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक एडवाइज़री पर लगातार नज़र रखें, बिना ज़रूरत यात्रा से बचें और किसी भी अफवाह के बजाय सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
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