शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट के बाद हलचल, लोकसभा अध्यक्ष ने बुलाई अहम बैठक
छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने के बाद बढ़ा सियासी संकट, उद्धव ठाकरे गुट के नेता आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने रखेंगे अपना पक्ष।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को बड़ा झटका लगने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद अब मामला संसद तक पहुंच गया है। इस घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार शाम एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता अपना पक्ष रखेंगे।
सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई शाम को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए मांग कर सकते हैं कि बागी सांसदों के समूह को अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता न दी जाए।
छह सांसदों के जाने से बढ़ी मुश्किलें
हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों ने आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इनमें संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश निम्बालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल अष्टीकर शामिल हैं।
इन सांसदों के जाने को शिंदे गुट की बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस कदम से लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट की स्थिति कमजोर हुई है और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
संजय राउत का तीखा हमला
घटनाक्रम के बाद शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए महाराष्ट्र के "गद्दारों" के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही।
राउत ने अपने संदेश में कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और पार्टी अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेगी। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है।
आदित्य ठाकरे ने भी साधा निशाना
उद्धव ठाकरे के पुत्र और शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने भी एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए उन्हें लेकर तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को जनता के बीच जवाब देना होगा।
आदित्य ठाकरे लगातार शिंदे गुट को निशाने पर लेते रहे हैं और इस ताजा घटनाक्रम के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता और बढ़ गई है।
शिंदे गुट का पलटवार
वहीं, शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने दावा किया कि यह सब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर लोगों के भरोसे का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार मजबूत हो रही है और आने वाले समय में और भी नेता शिंदे गुट का समर्थन कर सकते हैं।
म्हस्के ने शिवसेना (UBT) नेतृत्व, खासकर संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि संगठन के कई कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ होने वाली बैठक पर टिकी है। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि संसद में बागी सांसदों की स्थिति क्या होगी और उद्धव ठाकरे गुट की आगे की रणनीति क्या रहेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल पार्टी संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में शिवसेना की अंदरूनी लड़ाई और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।