महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान: राम गोपाल यादव का केंद्र पर ‘इतिहास मिटाने’ का आरोप

By  Preeti Kamal April 17th 2026 11:16 AM

नई दिल्ली, भारत: लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल में संशोधनों के पारित होने से पहले, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर "इतिहास मिटाने" की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बिल 2023 में पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। एसपी सांसद ने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, "इतिहास पहले ही बन चुका है। यह कानून पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। ये लोग उस इतिहास को मिटाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?"

उन्होंने भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को "सबसे भ्रष्ट और बेईमान" बताते हुए कहा, "इस (मौजूदा केंद्र सरकार) से ज्यादा भ्रष्ट और बेईमान कोई सरकार नहीं हो सकती।" राम गोपाल यादव का यह बयान एक दिन बाद आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से संशोधनों का समर्थन करने की अपील की थी और कहा था कि वह इस कानून के लागू होने का श्रेय नहीं चाहते।

हमें कोई श्रेय नहीं चाहिए, इसे पास होने दीजिए- प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा था, "हमें कोई श्रेय नहीं चाहिए। इसे पास होने दीजिए। आप श्रेय ले लीजिए। आप जिसका भी फोटो छपवाना चाहें, हम सरकारी खर्च पर छपवा देंगे।" वहीं, शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के (Naresh Mhaske) ने गुरुवार को दावा किया था कि विपक्षी सांसद संशोधनों को लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विपक्ष केवल लोगों को गुमराह करना चाहता है। इससे साफ है कि वे महिला आरक्षण बिल के खिलाफ हैं। विपक्ष को भी इस बिल का समर्थन करना चाहिए।"

पहली बार 2023 में पारित हुआ था महिला आरक्षण बिल

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' बिल, जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है, पहली बार 2023 में पारित हुआ था। पहले के बिल में इसके लागू होने को 2026-2027 की जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। हालांकि, वर्तमान संशोधन इन दोनों प्रक्रियाओं को अलग करते हुए 2029 के लोकसभा चुनावों में आरक्षित सीटों को लागू करने का प्रावधान करते हैं।

संविधान में महिला आरक्षण का प्रावधान है

लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जिसमे संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान है, उसके साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में लागू करने हेतु) और परिसीमन विधेयक, 2026 (लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने और पुनर्निर्धारण करने के लिए) पर चर्चा और मतदान जारी रहेगा।

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