नई दिल्ली, भारत: विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के डेयरी उत्पादकों, पशुपालकों और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने में उनके योगदान की सराहना की।

सोशल मीडिया मंच X पर जारी अपने संदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "विश्व दुग्ध दिवस की सभी डेयरी उत्पादकों, पशुपालकों, दुग्ध व्यवसाय से जुड़े लोगों और इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। मैं उन सभी अन्नदाताओं, पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने भारत को दूध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाया है।"

देश निर्माण में सभी ने समर्पण और मेहनत के साथ अपना योगदान दिया

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि देश निर्माण में सभी लोग इसी समर्पण और मेहनत के साथ अपना योगदान देते रहें, यही उनकी कामना है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने वर्ष 2001 में 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। तब से हर साल यह दिवस दूध के पोषण और महत्व को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है।

"भारत वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है"

भारत आज वैश्विक स्तर पर दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है। वर्ष 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना की गई थी और श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन को इसका नेतृत्व सौंपा गया था। इसके बाद 1970 से 1996 तक चले 'ऑपरेशन फ्लड' कार्यक्रम ने भारत में डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इस दौरान देशभर में 73 हजार से अधिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की गई।

"1998 से लगातार दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है"

भारत वर्ष 1998 से लगातार दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है और वर्तमान में विश्व के कुल दूध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है। वित्त वर्ष 2014-15 में देश का दूध उत्पादन 146.3 मिलियन टन था, जो 2023-24 में बढ़कर 239.2 मिलियन टन पहुंच गया। यह लगभग 63.56 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। देश में वर्तमान में 22 दुग्ध महासंघ, 240 जिला दुग्ध सहकारी संघ, 28 विपणन डेयरियां और 24 दुग्ध उत्पादक संगठन कार्यरत हैं, जो लगभग 2.30 लाख गांवों तक अपनी पहुंच बनाए हुए हैं।