Packed Food पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- लोगों खासकर बच्चों की हेल्थ राष्ट्रीय हित का मुद्दा

Packed Food Warning Label: ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले पैक्ड फूड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे बच्चों समेत लोगों की हेल्थ से जुड़ा राष्ट्रीय हित का मुद्दा बताया और आदेश जारी करने की बात कही।

By  Laxman September 10th 2026 06:45 PM -- Updated: September 10th 2026 06:14 PM

नई दिल्ली: पैक्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल (FoPL) से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला सीधे लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है और इसे राष्ट्रीय हित के मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अदालत ने इस मामले में अपना होमवर्क किया है और जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा। पीठ ने पक्षकारों से आदेश का अध्ययन करने और अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर को उपस्थित होने को कहा है।

पैक्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर क्या मामला है?

मामले में पैक्ड फूड उत्पादों पर उनकी पोषण संबंधी कमियों या अधिक मात्रा में मौजूद कुछ पोषक तत्वों को लेकर सामने की तरफ स्पष्ट चेतावनी देने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर ज्यादा सख्त चेतावनी व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों की तुलना अंडे या नमकीन काजू जैसे पोषण वाले खाद्य पदार्थों से नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी लेबल के लिए लाल रंग के अलावा किसी अन्य रंग पर विचार करने का सुझाव भी दिया। कोर्ट ने इस सुझाव का संज्ञान लिया।

FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया?

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अदालत में दाखिल अनुपालन हलफनामे में Front-of-Pack Labelling का प्रस्ताव रखा है।

इसके तहत ऐसे पैक्ड उत्पादों पर प्रमुखता से लाल रंग का हेक्सागोनल चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव है, जिनमें तय सीमा से ज्यादा मात्रा में दो या उससे अधिक संबंधित पोषक तत्व पाए जाते हैं।

प्रस्तावित चेतावनी श्रेणियों में शामिल हैं:

  • HIGH FAT
  • HIGH SALT
  • HIGH SUGAR
  • HIGHLY SWEETENED BEVERAGE

इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही यह जानकारी उपलब्ध कराना है कि किसी उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक संबंधित पोषक तत्व मौजूद हैं।

दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में ऐसे उत्पादों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिनमें एडेड फैट, एडेड शुगर और नमक में से दो या उससे अधिक तत्व तय सीमा से ज्यादा हों।

दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले उत्पादों को भी इसके दायरे में लाने का प्रस्ताव है।

हालांकि, प्रस्ताव में कुछ एकल-सामग्री वाले उत्पादों को छूट देने की बात कही गई है। इनमें घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद शामिल हैं।

FSSAI के अनुसार, संबंधित नियमों में संशोधन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद व्यवस्था को लागू किया जाएगा।

28 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस विषय पर सभी पक्षों का सहयोग जरूरी है। अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपना आदेश जारी करेगी और पक्षकारों को उसे पढ़कर अगली सुनवाई में आने को कहा है।

अब 28 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। उस दौरान कोर्ट के आदेश और आगे की प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो सकता है कि पैक्ड फूड पर चेतावनी लेबलिंग को लेकर नियामकीय व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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