नई दिल्ली: सरकार के लिए एक बड़े विधायी झटके में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जो 2029 के आम चुनावों से महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखता था, शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। इस हार के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी से संपर्क कर विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की कोशिश की।
परिणाम आने के बाद कांग्रेस और टीएमसी के बीच उच्च स्तरीय बातचीत ने संयुक्त विपक्ष के लिए इसे एक बड़ी सफलता का संकेत दिया। AITC के सूत्रों के अनुसार, विधेयक गिरने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को फोन कर उनकी भूमिका के लिए धन्यवाद दिया।
सरकार का बाकी विधायी एजेंडा भी ठप
विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर था कि महिला आरक्षण को 2029 तक टाल दिया गया और इसे विवादित परिसीमन विधेयक से जोड़ा गया, जिससे कई दलों को डर था कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ अन्याय होगा।
131वें संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सरकार का बाकी विधायी एजेंडा भी ठप हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार अब दो अन्य संबंधित विधेयकों—केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026—को आगे नहीं बढ़ाएगी।
राजनीतिक हेरफेर का जरिया था यह विधेयक- विपक्ष
परिसीमन विधेयक खास तौर पर विवाद का केंद्र रहा, जहां भाजपा ने इसे “वंशवादी राजनीति” खत्म करने का साधन बताया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक हेरफेर का जरिया कहा। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने घोषणा की कि विधेयक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, इसलिए यह पारित नहीं हुआ।