पुडुचेरी: डीजल महंगा होने से प्रभावित हुआ मछली व्यवसाय, केंद्र से राहत की उम्मीद

By  Preeti Kamal June 5th 2026 03:30 PM -- Updated: June 5th 2026 02:54 PM

पुडुचेरी: पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर पंजीकृत मछुआरों के लिए विशेष डीजल आपूर्ति व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि पुडुचेरी राज्य मत्स्य सहकारी महासंघ (फिशरमेन कोऑपरेटिव फेडरेशन) पुडुचेरी के थेंगैथिट्टू फिशिंग हार्बर और यानम के सावित्री नगर फिशिंग हार्बर में केवल पंजीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए डीजल आउटलेट संचालित करता है।

उन्होंने कहा कि महासंघ हर साल लगभग 50 लाख लीटर डीजल की आपूर्ति करता है, जिससे करीब 450 मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों और पुडुचेरी, कराईकल, माहे तथा यानम के एक लाख से अधिक मछुआरों की आजीविका जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि पहले भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा विशेष व्यवस्था के तहत महासंघ को खुदरा पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट) की दरों पर डीजल उपलब्ध कराया जाता था, जिससे मछुआरों को काफी राहत मिलती थी।

डीजल की कीमतों में बदलाव के चलते खुदरा दरों के बीच बढ़ा अंतर

हालांकि, हाल में डीजल मूल्य निर्धारण में हुए बदलावों के कारण थोक उपभोक्ता (बल्क कंज्यूमर) और खुदरा दरों के बीच अंतर बढ़ गया है। इससे मशीनीकृत नौकाओं के लिए ईंधन लागत में भारी वृद्धि हुई है। रंगासामी ने कहा कि ईंधन मछली पकड़ने के व्यवसाय में सबसे बड़ा खर्च होता है और वर्तमान मूल्य अंतर के कारण मछली पकड़ने का व्यवसाय आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने की डीजल की आपूर्ति खुदरा दरों पर जारी रखने की अपील

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सहकारी समिति के ये डीजल आउटलेट केवल पंजीकृत मछुआरों के कल्याण के लिए स्थापित किए गए हैं और ये व्यावसायिक पेट्रोल पंप नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि पहले की तरह डीजल की आपूर्ति खुदरा दरों पर जारी रखी जाए। वैकल्पिक रूप से, पंजीकृत मछुआरों को सहकारी आउटलेट्स के माध्यम से मिलने वाले डीजल पर विशेष मूल्य निर्धारण या सब्सिडी व्यवस्था लागू की जाए।

उन्होंने इस मुद्दे को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वार्षिक मछली पकड़ने पर लगे प्रतिबंध (फिशिंग बैन) की अवधि समाप्त होने के बाद मशीनीकृत नौकाएं दोबारा समुद्र में उतर रही हैं। ऐसे में सस्ता ईंधन उपलब्ध होना हजारों मछुआरा परिवारों की आजीविका बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

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