श्री हरमंदिर साहिब से गुरबानी प्रसारण रहेगा जारी...दिल्ली हाईकोर्ट का SGPC और PTC चैनल को स्टे देने से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने SGPC की याचिका पर सुनवाई करते हुए Galactic Television and Communications Pvt Ltd को श्री हरमंदिर साहिब से प्रसारित लाइव गुरबानी फीड को दोबारा प्रसारित करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने चैनल की कानूनी दलीलों में प्रथम दृष्टया दम माना है।

By  Preeti Kamal August 14th 2026 12:24 PM -- Updated: August 14th 2026 01:03 PM

पंजाब: दिल्ली हाईकोर्ट ने GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने किया इनकार। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि GTC पंजाबी पर गुरबानी प्रसारण अपने समयानुसार जारी रहेगा। दर्शकों के लिए यह एक अहम जानकारी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टे देने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण संगतों के लिए राहत भरी खबर है कि GTC पंजाबी (GTC Punjabi) पर गुरबानी का प्रसारण जारी रहेगा और यह रुकेगा नहीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिरोमणि कमेटी (SGPC) और PTC नेटवर्क की ओर से इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान GTC नेटवर्क की ओर से वरिष्ठ वकील पी.एस. पटवालिया और पवनजीत बिंद्रा अदालत में पेश हुए। अगली सुनवाई 23 सितंबर को: कोर्ट ने SGPC की याचिका पर नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।

GTC पंजाबी पर गुरबाणी का प्रसारण निर्बाध जारी रहेगा—MD रबींद्र नारायण

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए GTC नेटवर्क के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और प्रेसिडेंट रबींद्र नारायण जी ने बयान दिया कि "यह जजमेंट गुरु ने सुनाई है।" बता दें कि GTC पंजाबी की ओर से बीते 6 अगस्त से लगातार गुरबानी का प्रसारण किया जा रहा है और अदालत के इस फैसले से गुरबानी का प्रसारण निर्बाध जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि GTC पंजाबी श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबानी को DD Free Dish प्लेटफॉर्म के जरिए घर-घर तक पहुंचा रहा है, जहां यह पहले उपलब्ध नहीं थी। यह संगतों के लिए खुशी की खबर है।

तीन बड़ी बातें

अंतरिम रोक से कोर्ट का इनकार: दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल Galactic Television and Communications Pvt Ltd के खिलाफ Gurbani broadcast को लेकर कोई अस्थायी रोक नहीं लगाई। कानूनी दलीलों में प्रथम दृष्टया दम: कोर्ट ने कहा कि बिना शुल्क वाले प्रसारण और धार्मिक समारोह से जुड़े Copyright Act के प्रावधानों को लेकर चैनल की दलीलों में प्रथम दृष्टया मेरिट दिखाई देती है।

क्या है पूरी खबर ?

श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर से होने वाले लाइव गुरबानी प्रसारण को लेकर चल रहे कॉपीराइट विवाद में Galactic Television and Communications Pvt Ltd (GTC Network) को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है। हाई कोर्ट ने SGPC की ओर से दायर मुकदमे पर सुनवाई करते हुए चैनल को गुरबानी फीड के पुनः प्रसारण से रोकने वाला कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की अदालत में हुई। कोर्ट ने प्रारंभिक स्तर पर माना कि चैनल की ओर से पेश की गई कुछ कानूनी दलीलों में प्रथम दृष्टया दम है। खास तौर पर अदालत ने इस सवाल पर गौर किया कि जब प्रसारण दर्शकों को देखने के लिए किसी भुगतान से जुड़ा नहीं है, तो क्या SGPC जिस Broadcast Reproduction Right का दावा कर रही है, वह इस मामले में लागू होता है।

SGPC की ओर से किए गए मुकदमे के बाद यह मामला सामने आया

यह विवाद SGPC की ओर से दाखिल कॉपीराइट मुकदमे के बाद सामने आया। SGPC का आरोप है कि GTC Network और अन्य पक्ष बिना लाइसेंस के श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबानी की लाइव फीड को अपने टीवी चैनल पर deferred-live format में प्रसारित कर रहे हैं। SGPC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम. लाल ने अदालत में Copyright Act, 1957 की Section 37 का हवाला देते हुए दलील दी कि Broadcast Reproduction Right एक स्वतंत्र अधिकार है। उनके मुताबिक यह अधिकार मूल साहित्यिक, संगीत, साउंड रिकॉर्डिंग या सिनेमैटोग्राफ फिल्म से जुड़े कॉपीराइट से अलग है।

SGPC ने यह भी तर्क दिया कि लाइव गुरबानी प्रसारण किसी रिकॉर्डिंग माध्यम पर स्थायी रूप से दर्ज नहीं किया गया था, इसलिए इस मामले में सीधे Broadcast Reproduction Right का सवाल उठता है। SGPC की ओर से यह भी कहा गया कि Copyright Act की Section 52 में दिए गए अपवादों को Broadcast Reproduction Right पर लागू नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालत के सवाल पर SGPC की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल वह किसी भी पक्ष को गुरबानी प्रसारण का लाइसेंस नहीं देती है। यह स्थिति भुगतान के बदले या बिना भुगतान वाले लाइसेंस, दोनों पर लागू है।

GTC Network की ओर से क्या दलील दी गई?

GTC Network की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने SGPC के दावों का विरोध किया। उन्होंने मुख्य रूप से Copyright Act की Section 37(3)(b) और Section 52 के प्रावधानों का हवाला दिया। उनकी दलील थी कि Section 37(3)(b) में सार्वजनिक रूप से प्रसारण को सुनने या देखने के लिए भुगतान किए जाने की स्थिति का उल्लेख है। चूंकि संबंधित चैनल दर्शकों से इस प्रसारण को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं लेता, इसलिए यह प्रावधान मौजूदा मामले में लागू नहीं होना चाहिए।

उन्होंने धार्मिक समारोह से जुड़े Copyright Act के अपवाद का भी उल्लेख किया। Section 52(1)(ZA) के तहत bona fide religious ceremony के हिस्से के रूप में किसी साहित्यिक, नाटकीय या संगीत कृति अथवा साउंड रिकॉर्डिंग को जनता तक पहुंचाने से संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया। इसके अलावा Section 52(1)(L) पर भी भरोसा किया गया। चैनल की ओर से यह भी अदालत के सामने रखा गया कि SGPC ने पहले की कुछ कानूनी कार्यवाहियों में यह रुख अपनाया था कि उसका उद्देश्य दुनिया भर में अधिक से अधिक लोगों तक गुरबानी उपलब्ध कराना है।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में चैनल की ओर से Section 37(3)(b), Section 52(1)(ZA) और Section 52(1)(L) के आधार पर दी गई दलीलों को रिकॉर्ड किया। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर माना कि इन दलीलों में मेरिट है। इसी आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इस चरण पर कोई ad interim order जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मामले का अंतिम फैसला Galactic Television के पक्ष में हो गया है।

अदालत ने SGPC के मुकदमे पर नोटिस जारी करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद SGPC को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा।

मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी

मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार को लेकर भी आपत्ति उठाई गई है। चैनल की ओर से कहा गया कि SGPC और संबंधित प्रतिवादी दिल्ली से बाहर स्थित हैं। वहीं SGPC की ओर से बताया गया कि उसका कॉरपोरेट कार्यालय दिल्ली में है। अदालत ने इस आपत्ति को भी फिलहाल खुला रखा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों और दस्तावेजों के आधार पर विवाद आगे बढ़ेगा।

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