गुरबाणी प्रसारण: GTC Network के MD & President रबींद्र नारायण ने साझा किया 2008 का SGPC शपथपत्र
GTC Network के Founder-MD एवं President रबींद्र नारायण ने गुरबाणी प्रसारण को लेकर 2008 का SGPC शपथपत्र साझा किया, जिसके बाद प्रसारण अधिकार और पुराने दस्तावेजों को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई।
चंडीगढ़, पंजाब: गुरबाणी कीर्तन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसके प्रसारण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच GTC Network के Founder, Managing Director (MD) एवं President श्री रबींद्र नारायण जी ने अपने Facebook पोस्ट के जरिए वर्ष 2008 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल SGPC के एक शपथपत्र (affidavit) को सार्वजनिक चर्चा में लाया है।
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपने पोस्ट में C.W.P. No. 16097 of 2007 से जुड़े दस्तावेज की तस्वीर साझा करते हुए SGPC की ओर से अदालत में दाखिल affidavit के एक महत्वपूर्ण अंश का उल्लेख किया है। पोस्ट के अनुसार, यह affidavit 10 मार्च 2008 को दाखिल किया गया था।
‘सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गुरबाणी कीर्तन’
श्री रबींद्र नारायण जी द्वारा साझा किए गए दस्तावेज के मुताबिक, affidavit के पैराग्राफ 3 में SGPC की ओर से कहा गया था कि उसका प्रयास है कि श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर से प्रसारित होने वाला गुरबाणी कीर्तन सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो, ताकि दुनिया भर में अधिक से अधिक दर्शक, सिख और गैर-सिख, इसका लाभ उठा सकें। इस शपथपत्र में गुरबाणी कीर्तन को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने और अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

GTC Punjabi के प्रसारण प्रयास का भी किया उल्लेख
अपने Facebook पोस्ट में GTC Network के Founder, MD एवं President श्री रबींद्र नारायण जी ने इस पुराने शपथपत्र को वर्तमान समय में गुरबाणी प्रसारण से जोड़ते हुए GTC Punjabi के प्रयासों का उल्लेख किया।
पोस्ट के मुताबिक, GTC Punjabi श्री हरमंदिर साहिब से आने वाली गुरबाणी फीड को DD Free Dish सहित उन प्लेटफॉर्म और घरों तक पहुंचा रहा है, जहां यह पहले उपलब्ध नहीं थी। पोस्ट में दावा किया गया है कि यह प्रसारण बिना किसी विज्ञापन और व्यावसायिक राजस्व के उद्देश्य के किया जा रहा है।
‘हम SGPC की कही बात का उल्लंघन नहीं, पालन कर रहे हैं’
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपने पोस्ट में SGPC के 2008 के affidavit का हवाला देते हुए कहा कि यदि SGPC ने अदालत के समक्ष गुरबाणी कीर्तन को सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने और अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने की बात कही थी, तो आज संगत तक गुरबाणी पहुंचाने के प्रयास को उसी भावना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पोस्ट में उनका कहना है कि GTC Punjabi SGPC की उस समय अदालत में दर्ज कराई गई स्थिति का उल्लंघन नहीं कर रहा, बल्कि उसे पूरा कर रहा है।
‘गुरबाणी संगत की है’
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपने Facebook पोस्ट में गुरबाणी के व्यापक प्रसारण को संगत के हित से जोड़ते हुए लिखा कि “Gurbani belongs to the sangat. SGPC said so. On oath.” उनके द्वारा साझा किए गए दस्तावेज ने गुरबाणी प्रसारण को लेकर पहुंच, प्लेटफॉर्म की उपलब्धता और अधिक से अधिक संगत तक पवित्र गुरबाणी पहुंचाने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
वर्ष 2008 के इस affidavit के संदर्भ में अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि उस समय अदालत के समक्ष व्यक्त की गई SGPC की स्थिति को वर्तमान डिजिटल और टेलीविजन प्रसारण व्यवस्था में किस तरह देखा जाता है।