गुरबानी, विज्ञापन और प्रसारण की गरिमा... GTC Network के President रबींद्र नारायण ने SGPC के सामने रखे सवाल...
GTC Network के MD & President रबींद्र नारायण जी ने गुरबानी प्रसारण को लेकर PTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म, विज्ञापनों और प्रसारण की गरिमा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने SGPC से पूछा कि गुरबानी प्रसारण के नियम और मानदंड सभी चैनलों के लिए समान क्यों नहीं हैं और इस मामले में कार्रवाई का आधार क्या है?
चंडीगढ़, पंजाब: गुरबानी के प्रसारण की मर्यादा और इसे लेकर लागू नियमों पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। GTC Network के Founder, MD & President रबींद्र नारायण (Rabindra Narayan) जी ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर गुरबानी के प्रसारण को लेकर PTC और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) से कई अहम सवाल पूछे हैं।
उन्होंने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि गुरबानी के प्रसारण की गरिमा और सम्मान क्या सभी प्रसारणकर्ताओं के लिए एक समान है या फिर PTC के लिए अलग मानदंड लागू किए जा रहे हैं? आपको बता दें कि इससे पहले भी श्री रबींद्र नारायण जी ने फेसबुक पर गुरबानी के प्रसारण को लेकर अपने विचार साझा किए हैं, जिनमें उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उनका लक्ष्य गुरबानी को घर-घर तक पहुंचाना है।
‘सवाल GTC पंजाबी का नहीं, समान नियमों का है’
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में यह स्पष्ट किया कि मौजूदा सवाल सिर्फ GTC पंजाबी का नहीं है बल्कि असली सवाल यह है कि गुरबानी के प्रसारण के लिए सम्मान और नियम सभी के लिए समान हैं या नहीं? उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से गुरबानी प्रसारण की गरिमा को लेकर बार-बार दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि GTC पंजाबी ने इस गरिमा का हमेशा सम्मान किया है। उनका कहना है कि GTC पंजाबी गुरबानी के प्रसारण के दौरान विज्ञापन नहीं चलाता, क्योंकि संस्था पवित्र गुरबानी को कमाई का माध्यम नहीं बनाना चाहती।
PTC के डिजिटल प्रसारण को लेकर सवाल
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में PTC के गुरबानी प्रसारण को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि यदि PTC को सैटेलाइट टेलीविजन पर गुरबानी प्रसारण की व्यवस्था दी गई थी, तो PTC के YouTube, Facebook और वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी का प्रसारण किस आधार पर किया जा रहा है?
उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण के दौरान विज्ञापन चलते हैं और उनसे राजस्व उत्पन्न होता है, तो क्या इसे भी गुरबानी प्रसारण की उसी गरिमा के अनुरूप माना जाता है, जिसकी बात SGPC और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से की जाती रही है?
GTC पंजाबी पर हुई कार्रवाई का भी किया जिक्र
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि GTC पंजाबी के खिलाफ गुरबानी प्रसारण को लेकर पुलिस में शिकायतें की गई थीं। इसी संदर्भ में उन्होंने अब SGPC के सामने सवाल रखा है कि यदि यही नियम PTC पर भी लागू होते हैं, तो क्या उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले प्रसारण को लेकर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी?
‘क्या PTC को भी नोटिस मिलेगा?’
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में कई सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर PTC को केवल सैटेलाइट प्रसारण की अनुमति दी गई थी, तो उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण को कौन अधिकृत कर रहा है? इसके अलावा, उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर गुरबानी के साथ चलने वाले विज्ञापनों से आय उत्पन्न हो रही है, तो क्या SGPC इसे गुरबानी की गरिमा का उल्लंघन मानती है या नहीं?
श्री रबींद्र नारायण जी ने PTC के YouTube और Facebook का उस पेज को भी दिखाया जहां गुरबानी के प्रसारण के दौरान ही निरंतर विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे थे, इस पर उन्होंने पूछा है कि क्या इस पर भी कोई कार्रवाई होगी?
'यदि गुरबानी प्रसारण के नियम समान हैं, तो कार्रवाई का तरीका भी समान हो'
दरअसल, श्री रबींद्र नारायण जी के पोस्ट का सबसे अहम सवाल यही है कि यदि PTC और GTC पंजाबी के लिए गुरबानी प्रसारण के नियम समान हैं, तो कार्रवाई का तरीका भी समान होना चाहिए। उन्होंने एक तरफ GTC पंजाबी का उदाहरण देते हुए कहा कि चैनल गुरबानी का प्रसारण बिना विज्ञापनों के करता है, जबकि दूसरी तरफ PTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारण के दौरान विज्ञापनों और संभावित राजस्व का सवाल उठ रहा है। ऐसे में उन्होंने SGPC से पूछा कि आखिर कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है और क्या दोनों के लिए एक समान मानदंड लागू किए जा रहे हैं?
श्री रबींद्र नारायण की फेसबुक पोस्ट से उठे प्रमुख सवाल:
- PTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुरबानी प्रसारण किस अनुमति के तहत हो रहा है?
- क्या डिजिटल प्रसारण में विज्ञापनों से होने वाली आय की अनुमति है?
- क्या गुरबानी के साथ विज्ञापन चलाना प्रसारण की गरिमा के अनुरूप है?
- क्या GTC पंजाबी और PTC के लिए समान नियम लागू हैं?
- यदि नियम समान हैं, तो कार्रवाई भी समान क्यों नहीं?
- क्या SGPC इस मामले में PTC को नोटिस जारी करेगी?
‘SGPC से टकराव नहीं, निष्पक्षता की मांग’
श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य SGPC के साथ टकराव करना नहीं है। उन्होंने SGPC को अपना सम्मानित संगठन बताते हुए कहा कि इसी वजह से इस मामले में कथित असमानता उन्हें और अधिक पीड़ा देती है। उन्होंने SGPC से निष्पक्षता की मांग करते हुए सवाल किया कि GTC पंजाबी के लिए जो मान्यता और नियम हैं, क्या वही PTC के लिए भी लागू हैं?
उनका कहना है कि अगर दोनों के लिए नियम समान हैं, तो कार्रवाई भी समान होनी चाहिए। श्री रबींद्र नारायण जी ने अपनी पोस्ट के अंत में गुरबानी की पवित्रता और समानता पर जोर देते हुए कहा कि गुरबानी गुरु की है, इसलिए उसका सम्मान भी समान होना चाहिए और न्याय भी समान होना चाहिए। इस तरह अंत में उन्होंने “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” के साथ अपनी बात समाप्त की।