गुरदासपुर में पराली जलाने के खिलाफ पुलिस का अभियान तेज...
गुरदासपुर, पंजाब: पंजाब के गुरदासपुर में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिले के गांवों में लगातार निरीक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासनिक और पुलिस टीमें आसपास के गांवों का लगातार दौरा कर रही हैं ताकि कोई भी किसान फसल अवशेष में आग न लगाए।
इस पहल पर बात करते हुए एसएसपी आदित्य ने कहा कि इन शिविरों के जरिए लोगों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "गुरदासपुर पुलिस और जिला प्रशासन गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि पराली जलाने पर रोक लगाई जा सके। किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाने से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर पड़ता है।"
पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील
एसएसपी ने आगे कहा, "हम किसानों से अपील करते हैं कि वे पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं और प्रशासन का सहयोग करें। पराली जलाने पर प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हर गांव में एक पुलिस अधिकारी तैनात किया गया है, जो स्थानीय गतिविधियों पर नजर रखेगा और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करेगा। किसानों और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।
पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है
अधिकारियों ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, वायु गुणवत्ता खराब होती है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। पुलिस प्रशासन ने किसानों से वैकल्पिक पराली प्रबंधन उपाय अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
पंजाब सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए पराली जलाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य तय करते हुए सख्त कदम उठाए हैं। इसके तहत भारी सब्सिडी, तकनीकी निगरानी और कानूनी कार्रवाई को शामिल किया गया है।
80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है
500 करोड़ रुपये की योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों पर 50 प्रतिशत और किसान समूहों तथा सहकारी समितियों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।
2025 के अंत तक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही थीं। राज्य सरकार ऐसे किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में "रेड एंट्री" भी कर रही है, जिससे वे जमीन बेचने या उस पर लोन लेने में असमर्थ हो सकते हैं।
हो रहा है सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल
पंजाब सरकार रियल टाइम में आग की घटनाओं का पता लगाने के लिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल कर रही है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें जमीन पर जाकर घटनाओं की पुष्टि कर रही हैं। राज्य सरकार खेत में ही पराली प्रबंधन और पराली के वैकल्पिक उपयोग दोनों को बढ़ावा दे रही है।
इसमें बायोचार उत्पादन और थर्मल पावर प्लांट्स में धान की पराली से बने पेलेट्स के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्तसर और फाजिल्का जैसे ज्यादा प्रभावित जिलों में विशेष अभियान और किसानों के लिए काउंसलिंग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
सरकार को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है
हालांकि, इन उपायों के बावजूद सरकार को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मशीनों की लागत अधिक है और धान की कटाई व गेहूं की बुवाई के बीच समय बहुत कम होता है, जिससे उनके पास सीमित विकल्प बचते हैं।