जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी पर PM मोदी समेत अन्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि...

By  Preeti Kamal April 13th 2026 12:06 PM

नई दिल्ली, भारत: 13 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा एक गहरे दर्द और शहादत की याद दिलाता है। इसी दिन 1919 में पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत के सैनिकों ने निर्दोष भारतीयों पर गोलियां चलाकर नृशंस हत्या की। यह नरसंहार बैसाखी के अवसर पर आयोजित शांतिपूर्ण सभा में शामिल महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों तक को नहीं बख्शा गया।

निर्दोष लोग भागने के लिए बाग के कुएं में कूद गए, लेकिन वो भी लाशों से भर गया। इस दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। इतने वर्षों बाद भी जलियांवाला बाग की स्मृतियां हमें याद दिलाती हैं कि स्वतंत्रता और न्याय के लिए कितने बेकसूर लोग अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी पर नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।

पीएम मोदी ने  वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा, "इस दिन, हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना की एक सशक्त याद दिलाता है। उन्होंने जिस साहस और अटूट संकल्प का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों को भी देश की रक्षा के लिए तत्पर रहने हेतु निरंतर प्रेरित करता रहेगा।"

उनका साहस पीढ़ियों को न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा देगा- रक्षा मंत्री 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को जलियांवाला बाग हत्याकांड के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1919 में उनके बलिदान को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण बताया, जिसने देश की सामूहिक चेतना को जागृत किया। एक्स पर पोस्ट में सिंह ने लिखा, “1919 में आज ही के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी निर्दोष भारतीयों को श्रद्धांजलि। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण है, जिसने देश की सामूहिक चेतना को जगाया। उनका साहस पीढ़ियों को न्याय, गरिमा और आत्मसम्मान के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता रहेगा।”

पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “अमर शहीद” बताया

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “अमर शहीद” बताया। गडकरी ने एक्स पर लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड के अमर शहीदों को भावपूर्ण नमन।”

मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी- मुख्यमंत्री मोहन यादव 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इन अमर शहीदों का बलिदान देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आपकी अमर गाथा हमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और इस अमूल्य स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी।”

जलियांवाला बाग हत्याकांड इतिहास का काला अध्याय

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए अन्याय के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि। यह काला अध्याय हमें अन्याय के खिलाफ एकजुट रहने और देश की स्वतंत्रता व सम्मान की रक्षा के लिए संकल्पित रहने की प्रेरणा देता है।”

उनके बलिदान ने गरिमा के लिए देश के संकल्प को मजबूत किया

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसे भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताते हुए सैकड़ों निहत्थे लोगों के बलिदान को याद किया। उन्होंने लिखा, “1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड हमारे इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। सैकड़ों निहत्थे पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए, जिसने देश की चेतना पर गहरा घाव छोड़ा। हम उन शहीदों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिनके बलिदान ने स्वतंत्रता और गरिमा के लिए देश के संकल्प को मजबूत किया।”

निहत्थी भीड़ पर डायर ने गोली चलाने का दिया आदेश

यह हत्याकांड पंजाब के अमृतसर स्थित जलियाँवाला बाग में हुआ था, जहां बैसाखी के अवसर पर हजारों लोग एकत्र हुए थे। यह सभा रॉलेट एक्ट के विरोध और नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की रिहाई की मांग के लिए भी आयोजित की गई थी। ब्रिटिश अधिकारी रेजिनाल्ड डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। 

गोला-बारूद खत्म हो जाने तक की गई फॉयरिंग

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, “1650 राउंड गोलियां चलाई गईं और फायरिंग तब तक जारी रही जब तक गोला-बारूद खत्म नहीं हो गया।” जहां ब्रिटिश रिकॉर्ड में मृतकों की संख्या 291 बताई गई, वहीं भारतीय नेताओं जैसे मदन मोहन मालवीय ने 500 से अधिक लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस घटना के दौरान ब्रिगेडियर जनरल डायर ने अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया।

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