अंबाला के बवाल से पंजाब की सियासत तक, हिंदू वोटों पर AAP की नजर; कांग्रेस में हलचल

पंजाब की राजनीति में इन दिनों कई मोर्चों पर हलचल दिखाई दे रही है। अंबाला में सिख प्रदर्शन, सुखबीर बादल पर हमले के बाद की राजनीति, हिंदू मतदाताओं को साधने की AAP की कोशिश, कांग्रेस में राहुल गांधी के संभावित दौरे और अकाली दल के पूर्व विधायक के अमृतपाल सिंह की पार्टी में जाने से सियासी समीकरण चर्चा में हैं।

By  Laxman August 14th 2026 03:54 PM

चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में इस समय कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। एक तरफ आम आदमी पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए हिंदू मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने अंदरूनी गुटबाजी को संभालने की चुनौती बनी हुई है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के नेताओं का दूसरी राजनीतिक ताकतों की ओर जाना भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन रहा है।

इन सबके बीच हरियाणा के अंबाला में हुए सिख प्रदर्शन की घटना की गूंज पंजाब में भी सुनाई दे रही है। इसके अलावा नांदेड़ के एक गुरुद्वारे में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा और पंजाब के माहौल को लेकर अकाली दल की ओर से बयानबाजी जारी है।

सुखबीर बादल पर हमले के बाद हरसिमरत ने पुलिसकर्मी को कहा धन्यवाद

सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में हुए हमले के दौरान उनकी सुरक्षा करने वाले महाराष्ट्र पुलिस के इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ की अकाली दल नेता हरसिमरत कौर बादल ने सराहना की है।

हरसिमरत कौर ने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस अधिकारी के साहस को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमलावर और सुखबीर बादल के बीच खड़े होकर उनकी सुरक्षा की। उन्होंने इसे ड्यूटी और साहस की मिसाल बताया तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सुखबीर बादल ने भी इस घटना को लेकर कहा कि कुछ लोग पंजाब के हालात पर नियंत्रण करने और शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल के अध्यक्ष के तौर पर वह पंजाब की शांति को प्रभावित नहीं होने देंगे।

 

अंबाला के प्रदर्शन की पंजाब में क्यों हो रही चर्चा?

हरियाणा के अंबाला में पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे से जुड़े विवाद के बाद प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों की मांग गिरफ्तार किए गए दो लोगों की रिहाई से जुड़ी थी।

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई घंटे तक यात्री जाम में फंसे रहे।

स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के मुताबिक, पथराव और धारदार हथियारों से हमले की घटनाएं हुईं। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग किया।

घटना में डीएसपी वीरेंद्र शर्मा समेत छह पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। डीएसपी पर धारदार हथियार से हमला किए जाने की भी जानकारी दी गई। घटना हरियाणा में हुई, लेकिन पंजाब से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक संदर्भों के कारण इसे पंजाब की सियासत में भी चर्चा का विषय माना जा रहा है।

AAP का हिंदू वोटों पर फोकस कितना अहम?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना भी माना जा रहा है। इसी क्रम में फगवाड़ा में भगवान शिव को समर्पित एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की तुलना आधुनिक युग के श्रवण कुमार से की। इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है।

इसके साथ ही पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना भी चर्चा में है। योजना के तहत श्रद्धालुओं को अलग-अलग धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। हाल में खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मथुरा-वृंदावन और हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे स्थानों को भी योजना में शामिल किया गया है।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या AAP की यह रणनीति पंजाब के हिंदू मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत कर पाएगी। इसका वास्तविक असर चुनावी राजनीति में ही सामने आएगा।

राहुल गांधी के दौरे से कांग्रेस को क्या उम्मीद?

दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस अपने अंदर चल रही गुटबाजी से जूझ रही है। पार्टी में अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच मतभेद की खबरों के बीच राहुल गांधी के अगस्त के अंत में पंजाब दौरे की चर्चा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके दौरे की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस एकजुट नजर आए। इसके लिए बस यात्रा जैसे कार्यक्रम की योजना पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।

पार्टी के लिए यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से जारी अंदरूनी खींचतान का असर संगठन और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। राहुल गांधी का दौरा अगर होता है तो उनके सामने पार्टी नेताओं को एक मंच पर लाने और संगठन में बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी।

अकाली दल को एक और झटका

पंजाब की सियासत में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब हुआ जब पूर्व विधायक इकबाल सिंह झुंदन ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का दामन थाम लिया।

झुंदन शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने 2007 में धुरी और 2012 में अमरगढ़ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। कुछ समय पहले उन्होंने शिरोमणि अकाली दल से अलग होने का फैसला किया था।

अब वह अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल हो गए हैं। उनके शामिल होने के दौरान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह भी मौजूद रहे।

झुंदन के इस कदम को पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ AAP अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस संगठनात्मक चुनौती से जूझ रही है और अकाली दल से नेताओं का दूसरी तरफ जाना उसके लिए नई चुनौती पैदा कर रहा है।

फिलहाल पंजाब की राजनीति में धार्मिक मुद्दों, वोट बैंक, पार्टी के अंदरूनी समीकरण और नए राजनीतिक गठजोड़ों को लेकर गतिविधियां तेज हैं। आने वाले महीनों में इन घटनाक्रमों का असर राज्य की चुनावी रणनीतियों पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

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