पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के आरोपों पर सचिन पायलट का जवाब, बोले- पार्टी किसी एक चेहरे पर निर्भर नहीं

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सचिन पायलट ने कांग्रेस में गुटबाजी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने परगट सिंह के नेतृत्व, कैप्टन अमरिंदर सिंह, आम आदमी पार्टी सरकार, नशे, गैंगस्टर और राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी अपनी बात रखी।

By  Preeti Kamal October 31st 2026 12:20 PM -- Updated: October 31st 2026 11:24 AM

नई दिल्ली: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बीच कांग्रेस महासचिव और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी और नेताओं के बीच खींचतान के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी एक या दो नेताओं के भरोसे नहीं, बल्कि मजबूत संगठन और सामूहिक नेतृत्व के दम पर चुनाव लड़ेगी। एक विशेष साक्षात्कार में सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस 140 साल पुरानी पार्टी है और देश के हर गांव में उसकी मौजूदगी है।

पार्टी में नए नेताओं का उभरना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पंजाब में नेतृत्व करने के लिए अनुभवी नेताओं की कोई कमी नहीं है। पायलट ने पार्टी में आंतरिक प्रतिस्पर्धा को गुटबाजी मानने से इनकार करते हुए इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बताया। उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी सिर्फ एक, दो या पांच नेताओं पर निर्भर नहीं है। जब नए पौधे लगाए जाते हैं, तो नए फूल खिलते हैं और नए नेता सामने आते हैं। यही जीवन का स्वाभाविक तरीका है।"

परगट सिंह की अगुवाई में सामूहिक नेतृत्व पर जोर

पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह का जिक्र करते हुए पायलट ने कहा कि पार्टी किसी एक मजबूत चेहरे के बजाय पूरी टीम के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने परगट सिंह की खेल पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कप्तान तभी मजबूत होता है, जब उसके पीछे पूरी टीम खड़ी हो।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अलग-अलग जिलों में ऐसे कई जमीनी नेता हैं, जो विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पायलट के मुताबिक, पार्टी के लिए यह उसकी ताकत है, न कि आपसी प्रतिस्पर्धा की वजह।

मुख्यमंत्री चेहरे पर क्या बोले सचिन पायलट?

2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा, इस सवाल पर पायलट ने स्पष्ट किया कि विपक्ष में रहते हुए पार्टी सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चुनाव लड़ती है। इसमें नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं की अहम भूमिका होती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां मुख्यमंत्री के अलावा दूसरे नेताओं की पहचान स्पष्ट नहीं है, जबकि कांग्रेस के पास नेतृत्व की कई मजबूत परतें हैं।

राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी को लेकर भी रही चर्चा

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चाएं होती रही हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 2 अक्टूबर को पद छोड़ने के बाद सचिन पायलट की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि पायलट ने उन्हें पद से हटाने का फैसला किया होगा, हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण होने से इनकार किया था।

इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की ओर से उनके समर्थन में नारेबाजी को लेकर भी पार्टी में नेतृत्व और गुटबाजी की चर्चाएं सामने आई थीं। पायलट ने इन परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस के सामूहिक नेतृत्व पर भरोसा जताया।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीजेपी में जाने पर क्या कहा?

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर पायलट ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अच्छा व्यक्ति बताया, लेकिन उनके पार्टी छोड़ने के फैसले को निजी निर्णय करार दिया। उन्होंने दावा किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी में भी खुश नहीं हैं और उनके अपने बयान इस बात को दर्शाते हैं। पायलट ने आरोप लगाया कि बीजेपी में नए नेताओं को वास्तविक सम्मान नहीं मिलता और पंजाब बीजेपी के कई प्रमुख चेहरे पूर्व कांग्रेसी हैं।

कैप्टन की कांग्रेस में वापसी को लेकर संभावित बातचीत के सवाल पर पायलट ने कहा कि उनकी कैप्टन अमरिंदर सिंह से कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी नेता का पार्टी छोड़ना अच्छी बात नहीं होती, लेकिन कई बार नेता दबाव, कानूनी मामलों या छापेमारी जैसी परिस्थितियों के कारण पार्टी छोड़ देते हैं। 

ड्रोन के जरिए हथियारों, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में केंद्र नाकाम

पायलट ने केंद्र सरकार पर भी सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने कहा कि पंजाब के गांवों तक नशे का नेटवर्क फैलने में स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक तंत्र की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं है। पायलट ने स्वीकार किया कि नशे की समस्या कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी मौजूद थी, लेकिन उनके मुताबिक अब स्थिति पहले से दस गुना ज्यादा खराब हो गई है।

गैंगस्टर और फिरौती के नेटवर्क पर चिंता जताई

पायलट ने नशे के कारोबार को हथियारों और गैंगस्टर नेटवर्क से जोड़ते हुए कहा कि नशे से मिलने वाला पैसा अवैध हथियारों की खरीद में इस्तेमाल होता है। इसके बाद गैंगस्टर फिरौती के नेटवर्क चलाते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ गैंगस्टर जेल के भीतर से भी फिरौती का कारोबार संचालित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि व्यापारियों को विदेशों से फिरौती के लिए फोन आते हैं और डर के कारण कई लोग पुलिस में शिकायत तक नहीं कर पाते। पायलट ने दावा किया कि उन्होंने ऐसे कई परिवारों से मुलाकात की है, जिन्होंने फिरौती की रकम नहीं दे पाने या देने से इनकार करने के कारण अपने परिजनों को खोया है।

पंजाब पर 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने का दावा

राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए पायलट ने दावा किया कि पंजाब का कर्ज बढ़कर 4.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पहले करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश नहीं आ रहा, प्रतिभाशाली युवा दूसरे राज्यों की ओर जा रहे हैं और नशे की समस्या सामाजिक ढांचे को कमजोर कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार का मुख्य एजेंडा अपने नेताओं को बढ़ावा देना और उनकी राजनीतिक छवि चमकाना है। पायलट ने कहा कि कांग्रेस पंजाब को फिर से उस दौर में ले जाना चाहती है, जब राज्य ने हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के जरिए देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की अटकलों पर भी रखी राय

अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर पायलट ने कहा कि कांग्रेस की मुख्य राजनीतिक लड़ाई पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ है। उन्होंने दावा किया कि दोआबा, माझा और मालवा क्षेत्रों में कांग्रेस का जनाधार मजबूत है।

पायलट ने कहा कि पंजाब के मतदाता स्थिर और लंबे समय तक चलने वाली सरकार चाहते हैं। उनके मुताबिक, राज्य में सरकार बनाने की क्षमता रखने वाले दो ही प्रमुख विकल्प हैं। उन्होंने दावा किया कि AAP ने जनता से एक मौका मांगा था, लेकिन अब लोग बदलाव चाहते हैं।

गौरतलब है कि पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को केवल 18 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में वापसी की तैयारी कर रही है।

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