चंडीगढ़:  पंजाब में नशे के कारोबार को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने के ऐलान पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पलटवार किया है। मान ने कहा कि केवल घोषणा करने से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इसके लिए ठोस कार्रवाई और जनता का सहयोग जरूरी है। उन्होंने गुजरात से नशीले पदार्थों की खेप आने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार की नशा रोकने की रणनीति पर भी सवाल उठा

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा और कांग्रेस लगातार आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को कानून-व्यवस्था और नशा तस्करी के मुद्दे पर घेर रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र और पूर्ववर्ती सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया है।

अमित शाह के बयान पर भगवंत मान का जवाब

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में पंजाब में नशे के कारोबार को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनेगी। साथ ही उन्होंने वर्ष 2029 तक राज्य से नशे के कारोबार को समाप्त करने का संकल्प जताया।

शाह ने पंजाब की AAP सरकार पर आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल में नशे का कारोबार बढ़ा है। उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि केवल बहाने बनाने से काम नहीं चलता, बल्कि सरकार को परिणाम देने होते हैं।

अमित शाह के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भगवंत मान ने कहा कि किसी नेता के कह देने भर से नशे की समस्या खत्म नहीं होती।  मान  ने कहा, अमित शाह के कहने से नहीं होता है, लोगों के कहने से होता है। उनके मुताबिक, इसके लिए प्रभावी कार्रवाई और जनता की भागीदारी आवश्यक है। मान की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि पंजाब में नशे का मुद्दा चुनावी राजनीति में और प्रमुखता से उठाया जा सकता है।

भगवंत मान ने गुजरात को लेकर क्या आरोप लगाया?

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि देश में नशीले पदार्थों की बड़ी खेपें गुजरात के रास्ते आ रही हैं। उन्होंने बंदरगाहों पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। मान ने कहा कि यदि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए सीमा पार नशीले पदार्थ भेजे जाने की आशंका है, तो बंदरगाहों के माध्यम से आने वाली बड़ी खेपों की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मान ने अपने बयान में नशीले पदार्थों की जब्ती से जुड़े बड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि बंदरगाहों पर सुरक्षा और सीमा शुल्क की प्रक्रियाएं मौजूद होने के बावजूद इतनी बड़ी खेपें देश में कैसे पहुंचती हैं।

हालांकि, गुजरात को नशे की आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र बताना मुख्यमंत्री का आरोप है। इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित एजेंसियों के आधिकारिक आंकड़ों, जब्ती के मामलों और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है। किसी स्थान पर नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़े जाने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि वही पूरे देश में आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र है।

पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना

भगवंत मान ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर 2007 से 2017 के बीच सत्ता में रही अकाली दल-भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नशा तस्करी से जुड़े कई बड़े मामलों में प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए थे।

मान ने दावा किया कि अब नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को अपने पुराने शासनकाल का भी जवाब देना चाहिए। उनके बयान का मकसद विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा उठाना है।

दूसरी ओर, नशा तस्करी जैसे गंभीर मामले में किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की भूमिका तय करने के लिए जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। राजनीतिक आरोपों को प्रमाणित तथ्यों से अलग रखना जरूरी है।

पंजाब चुनाव से पहले नशा बना बड़ा मुद्दा

पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रही है। सीमावर्ती इलाकों में तस्करी, ड्रोन के कथित इस्तेमाल, नशीले पदार्थों की बरामदगी और युवाओं पर इसके प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

अमित शाह का 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का ऐलान और भगवंत मान की प्रतिक्रिया इस मुद्दे को चुनावी बहस के केंद्र में ला सकती है। भाजपा जहां AAP सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रही है, वहीं मान केंद्र सरकार और पिछली राज्य सरकारों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अब अहम सवाल यह है कि राजनीतिक बयानों के बीच नशे की आपूर्ति रोकने, तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाते हैं। केवल आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रभावी जांच, सीमा और बंदरगाहों पर निगरानी, तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तथा नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है।