नई दिल्ली:  भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज रोकने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने फिल्म की निर्धारित रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है। यह विवाद गांगुली की पहचान, उनके क्रिकेट करियर से जुड़े ऐतिहासिक पलों और उनके व्यक्तित्व अधिकारों के कथित इस्तेमाल को लेकर सामने आया है।

गांगुली और प्रोडक्शन हाउस लव फिल्म्स एलएलपी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में पूर्व क्रिकेट कप्तान की पहचान और उनसे जुड़े चर्चित क्रिकेट क्षणों का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की थी। हालांकि, निर्माताओं ने दलील दी कि ‘दूसरा’ गांगुली की बायोपिक नहीं है, बल्कि एक युवा महिला के संघर्ष और स्वतंत्रता की कहानी है।

क्यों विवादों में आई फिल्म ‘दूसरा’?

फिल्म को लेकर विवाद का प्रमुख केंद्र साल 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी में भारत की ऐतिहासिक जीत और उसके बाद लॉर्ड्स मैदान की बालकनी में सौरव गांगुली का शर्ट उतारकर जश्न मनाना है। यह घटना भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित पलों में गिनी जाती है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म और उसके प्रचार में गांगुली की पहचान तथा उनके क्रिकेट करियर से जुड़े क्षणों का इस्तेमाल उनके व्यावसायिक हितों को प्रभावित कर सकता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी लोकप्रिय व्यक्ति की पहचान का व्यावसायिक उपयोग उसके अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

इस मामले में लव फिल्म्स की ओर से बनाई जा रही गांगुली की आधिकारिक बायोपिक भी महत्वपूर्ण पहलू है। याचिका के अनुसार, 5 अगस्त 2021 को हुए समझौते के तहत प्रोडक्शन हाउस को गांगुली के जीवन और क्रिकेट करियर पर फिल्म बनाने के विशेष अधिकार मिले थे। ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने ‘दूसरा’ में उनकी पहचान और ऐतिहासिक क्रिकेट पलों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।

निर्माताओं ने कहा- यह गांगुली की बायोपिक नहीं

फिल्म के निर्माताओं ने अदालत में आरोपों का विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि ‘दूसरा’ की कहानी सौरव गांगुली के जीवन पर आधारित नहीं है। उनके अनुसार, फिल्म राजस्थान के एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की तारा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सामाजिक बंधनों और पारिवारिक रूढ़ियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है।

निर्माताओं की दलील के मुताबिक, टेलीविजन पर गांगुली का ऐतिहासिक जश्न देखना तारा के लिए प्रेरणा का क्षण बनता है। यह दृश्य उसकी जिंदगी में साहस, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करता है।

अदालत में निर्माताओं ने यह भी कहा कि फिल्म में इस्तेमाल किए गए संबंधित क्रिकेट फुटेज के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से आवश्यक अनुमति ली गई है। उन्होंने यह तर्क भी रखा कि रिलीज से पहले सिनेमाघरों की बुकिंग और अन्य तैयारियों पर काफी काम किया जा चुका है। ऐसे में रिलीज रोकने से फिल्म के कारोबार और निर्माताओं को नुकसान हो सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने शुरुआती स्तर पर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस चरण पर सुविधा का संतुलन निर्माताओं के पक्ष में माना गया।

हालांकि, अंतरिम राहत देने से इनकार को विवाद का अंतिम फैसला नहीं समझा जाना चाहिए। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि सौरव गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े सभी दावे खारिज हो गए हैं। अदालत में उठाए गए सवालों और पक्षकारों के दावों पर अंतिम निर्णय अलग प्रक्रिया का हिस्सा है।

मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। इस सुनवाई में आगे क्या रुख सामने आता है, इस पर फिल्म के निर्माताओं और गांगुली, दोनों की नजर रहेगी।

क्या है फिल्म ‘दूसरा’ की कहानी?

निर्देशक अभिनय देव की फिल्म ‘दूसरा: इंडियाज अदर फ्रीडम स्ट्रगल’ वर्ष 2002 की नेटवेस्ट सीरीज में भारत की जीत की पृष्ठभूमि पर व्यक्तिगत आजादी और सामाजिक बंधनों से मुक्ति की कहानी पेश करती है। फिल्म में प्लबिता बोरठाकुर, अंकुर विकल और समिधा गुरु प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

फिल्म का निर्माण माशा सजदेह और रोहन सजदेह ने किया है, जबकि नीता शाह सह-निर्माता हैं। इसकी कहानी और पटकथा एग्नेलो ओसविन डायस ने लिखी है और संगीत राम संपत ने तैयार किया है।

फिल्म के कथानक में क्रिकेट के एक यादगार पल को एक लड़की की निजी जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की गई है। यही जुड़ाव अब कानूनी विवाद का हिस्सा बन गया है।

रिलीज से पहले कानूनी लड़ाई पर नजर

सौरव गांगुली और फिल्म ‘दूसरा’ के निर्माताओं के बीच विवाद ने रिलीज से पहले फिल्म को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म के प्रदर्शन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है, जिससे निर्धारित रिलीज की राह खुली हुई है।

अब इस मामले में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। विवाद का केंद्र यह है कि किसी ऐतिहासिक सार्वजनिक घटना या क्रिकेट फुटेज का फिल्म में इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है और किसी चर्चित व्यक्ति की पहचान से जुड़े व्यावसायिक अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की आगे की कार्यवाही और आदेशों से ही स्पष्ट होगी।