'गुलामी की निशानियों को माथे पर लगाकर घूमना नए भारत को स्वीकार नहीं' : तरुण चुग

राज्यसभा में तरुण चुग ने केरल नाम परिवर्तन विधेयक का समर्थन करते हुए इसे औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारत की मूल सभ्यतागत पहचान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बताया।

By  Preeti Kamal August 12th 2026 09:54 PM -- Updated: August 12th 2026 09:41 PM

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने राज्यसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने सदन से इसे सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह केवल किसी राज्य का नाम बदलने का विषय नहीं है, बल्कि भारत को औपनिवेशिक विरासत और गुलामी की निशानियों से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तरुण चुग ने कहा कि जिन शक्तियों ने भारत पर शासन किया और देश को गुलाम बनाया, उनके द्वारा छोड़ी गई पहचान और प्रतीकों को स्वतंत्र भारत की स्थायी पहचान मानकर चलते रहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी है। उनके मुताबिक, गुलामी के कलंक को मिटाना और भारत को उसकी ऐतिहासिक पहचान लौटाना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।

‘यह इतिहास बदलने का प्रयास नहीं’

चुग ने स्पष्ट किया कि केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव इतिहास बदलने का प्रयास नहीं है। उन्होंने इसे औपनिवेशिक शासन के दौरान बदली या प्रचलित की गई पहचान से बाहर निकलकर मूल पहचान को पुनर्स्थापित करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत एक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी राष्ट्र है। ऐसे में देश की संवैधानिक पहचान ऐसी होनी चाहिए जो उसकी सभ्यता, भाषा, संस्कृति और इतिहास पर गर्व को दर्शाए।

‘नाम में क्या रखा है’ के सवाल पर दिया जवाब

विपक्षी सांसदों की ओर से उठाए गए ‘नाम में क्या रखा है’ वाले सवाल पर तरुण चुग ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि नाम में क्या रखा है, बल्कि यह है कि नाम में क्या-क्या रखा है। उन्होंने कहा कि किसी देश या समाज का नाम केवल अक्षरों का समूह नहीं होता। उसके साथ ऐतिहासिक स्मृति, सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत पहचान जुड़ी होती है।

चुग के मुताबिक, यदि किसी गुलाम देश की पहचान को शासकों ने अपनी सुविधा के अनुसार बदला या प्रचलित किया था, तो स्वतंत्रता के बाद उस पहचान की समीक्षा करना औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की स्वाभाविक प्रक्रिया है।

‘केरलम’ को मूल पहचान की संवैधानिक स्वीकृति बताया

तरुण चुग ने कहा कि ‘केरलम’ नाम केरल की भाषा और सांस्कृतिक स्मृति में लंबे समय से मौजूद रहा है। इसलिए इसे किसी नई पहचान को थोपने की कोशिश नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उस पहचान को संवैधानिक दस्तावेजों में उचित स्थान देने की प्रक्रिया है, जो स्थानीय भाषा और संस्कृति में पहले से मौजूद है।

आदि शंकराचार्य की भूमि का किया उल्लेख

राज्यसभा में चर्चा के दौरान चुग ने केरल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केरल आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि है, जिन्होंने भारत की आध्यात्मिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि कालडी से निकलकर आदि शंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं में भारत की एकात्म चेतना को स्थापित किया। चुग के अनुसार, भारत की यह सभ्यतागत पहचान किसी औपनिवेशिक शक्ति की देन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की परंपरा का परिणाम है।

‘गुलामी की निशानियां केवल नामों में नहीं, मानसिकता में भी’

तरुण चुग ने कहा कि औपनिवेशिक विरासत केवल इमारतों, सड़कों या स्थानों के नामों में दिखाई नहीं देती, बल्कि मानसिकता में भी मौजूद हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र भारत अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की जगह औपनिवेशिक दौर से चली आ रही पहचान को ही अंतिम सत्य मान लेता है, तो राजनीतिक स्वतंत्रता के बावजूद मानसिक गुलामी बनी रह सकती है।

विकास के मुद्दे पर विपक्ष को दिया जवाब

विपक्ष की ओर से नाम परिवर्तन को विकास से जोड़कर उठाए गए सवालों पर चुग ने कहा कि विकास और राष्ट्रीय पहचान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने सदन में केंद्र सरकार की ओर से केरल को दी गई वित्तीय सहायता का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान केरल को कर हस्तांतरण के रूप में करीब 46,300 करोड़ रुपये मिले, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह राशि बढ़कर करीब 1.57 लाख करोड़ रुपये हो गई।

उन्होंने सहायता अनुदान का भी जिक्र किया और दावा किया कि यूपीए के दशक में दिए गए करीब 25,630 करोड़ रुपये की तुलना में मोदी सरकार के कार्यकाल में करीब 1,56,214 करोड़ रुपये दिए गए।

‘विकसित भारत’ में आर्थिक विकास, सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी जरूरी

चुग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार विकसित भारत वह होगा जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ मानसिक रूप से स्वतंत्र और अपनी सभ्यतागत पहचान के प्रति आत्मविश्वासी भी हो। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ औपनिवेशिक मानसिकता की बची हुई परतों को पीछे छोड़ना भी जरूरी है।

‘केरल से केरलम’ को बताया व्यापक राष्ट्रीय भावना का हिस्सा

तरुण चुग ने कहा कि ‘केरल’ से ‘केरलम’ की यात्रा व्यापक राष्ट्रीय भावना का हिस्सा है। उनके मुताबिक यह केवल नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी मूल पहचान को संवैधानिक रूप से स्वीकार करने की दिशा में कदम है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को ऐसे कदमों के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत को उन प्रतीकों और पहचानों को अनिवार्य रूप से ढोने की जरूरत नहीं है, जो औपनिवेशिक शासन की देन हैं।

‘आजादी का अर्थ अपनी पहचान खुद तय करना भी है’

तरुण चुग ने कहा कि आजादी का अर्थ केवल अंग्रेजों के भारत से चले जाने तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ यह भी है कि भारत अपनी पहचान स्वयं तय करे, अपने इतिहास का सम्मान करे और अपनी सभ्यता को औपनिवेशिक नजरिए से देखने के लिए बाध्य न हो।

उन्होंने कहा कि गुलामी की निशानियों को माथे पर लगाकर घूमना आजाद भारत की नियति नहीं हो सकती। गुलामी के कलंक को मिटाना, औपनिवेशिक मानसिकता को पीछे छोड़ना और भारत का आत्मसम्मान लौटाना ही स्वतंत्रता का सच्चा सम्मान है।

दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन की अपील

चुग ने राज्यसभा के सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘केरल’ से ‘केरलम’ केवल नाम की यात्रा नहीं है, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता से आत्मसम्मान की ओर और पराधीनता की स्मृतियों से आत्मविश्वासी भारत की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

मुख्य बिंदु
  • तरुण चुग ने राज्यसभा में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ का समर्थन किया।
  • उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन के बजाय औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक बताया।
  • चुग ने ‘केरलम’ को स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा नाम बताया।
  • उन्होंने विकास और राष्ट्रीय पहचान को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना।
  • उन्होंने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.