‘नशे और अपराध की आग में झोंका पंजाब’, राज्यसभा में तरुण चुग का AAP सरकार पर हमला...
राज्यसभा में BJP सांसद तरुण चुग ने पंजाब में नशे और कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष NDPS कोर्ट, एंटी-ड्रोन सिस्टम और युवाओं के लिए पुनर्वास पैकेज की मांग की।
चंडीगढ़, पंजाब: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग (Tarun Chugh) ने सोमवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पंजाब में कथित रूप से बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते नशे के संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और सीमा पार से आने वाले खतरों ने राज्य की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।
चुग ने केंद्र सरकार से पंजाब के नशा प्रभावित जिलों में विशेष NDPS न्यायालय, 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम और सीमावर्ती इलाकों के युवाओं के लिए पुनर्वास व रोजगार से जुड़ा विशेष पैकेज तैयार करने की मांग की।
NCRB के आंकड़ों का हवाला देकर पंजाब सरकार पर निशाना
तरुण चुग ने गृह मंत्रालय के National Crime Records Bureau (NCRB) की Crime in India 2024 रिपोर्ट का हवाला देते हुए पंजाब में नशे और अपराध से जुड़े आंकड़े सदन के सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि मादक पदार्थ रखने से जुड़े 6,060 मामलों के साथ पंजाब देश में सबसे ऊपर है। उनके मुताबिक, नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों की संख्या 2023 में 89 से बढ़कर 2024 में 106 हो गई।
चुग ने यह भी कहा कि पंजाब में 1,356 स्नैचिंग, 1,079 हत्याएं और एक वर्ष में जेल से फरार होने के 48 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े हैं, जो राज्य की स्थिति की गंभीरता को दिखाते हैं।
सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशे और हथियार आने का दावा
तरुण चुग ने पंजाब में बढ़ते नशे और अपराध को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ते हुए कहा कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों के साथ हथियार और विस्फोटक भेजे जाने का खतरा बढ़ा है। उन्होंने BSF के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब सीमा पर पकड़े या रोके गए ड्रोन की संख्या 2022 में 21 से बढ़कर 2024 में 294 हो गई।
चुग के मुताबिक, इन ड्रोन के जरिए हेरोइन के अलावा हथियार, हैंड ग्रेनेड और RDX जैसे विस्फोटक भेजे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सितंबर 2024 से पंजाब में 21 से अधिक ग्रेनेड और विस्फोट के हमले हुए हैं, जिनमें सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया।
‘करीब 60 हजार NDPS मामले लंबित’
तरुण चुग ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नवंबर 2025 में राज्य में नशे की स्थिति को गंभीर संकट बताया था। उन्होंने गृह मंत्रालय की हालिया समीक्षा का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब में करीब 60 हजार NDPS मामले लंबित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े लंबित मामलों के बावजूद राज्य में एक भी विशेष NDPS न्यायालय कार्यरत नहीं है।
चुग ने कहा कि नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए तेज न्यायिक प्रक्रिया, प्रभावी जांच और नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के पुनर्वास की भी जरूरत है।
‘AAP सरकार नशे और अपराध पर रोक लगाने में विफल’
तरुण चुग ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले नशे के खिलाफ बड़े वादे किए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है। चुग ने कहा कि पंजाब को नशे और अपराध की स्थिति में धकेलने के लिए अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं है, बल्कि पंजाब की एक पूरी पीढ़ी के भविष्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।
तरुण चुग ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान तरुण चुग ने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख कदम उठाने की मांग की—
- नशा प्रभावित जिलों में विशेष NDPS न्यायालयों की स्थापना।
- पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती को सर्वोच्च प्राथमिकता।
- सीमावर्ती जिलों के युवाओं के लिए पुनर्वास और रोजगार का विशेष पैकेज।
तरुण चुग ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए नशा तस्करी और ड्रोन गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई हैं।
पंजाब में नशे के खिलाफ बहस फिर तेज
राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद पंजाब में नशे की समस्या, लंबित NDPS मामलों, सीमा पार से ड्रोन गतिविधियों और कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। हालांकि, चुग द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों और आरोपों के संदर्भ में संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट अंतिम तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगी।