नोएडा: मजदूरों की मांगे पूरी, 10 तारीख तक वेतन, नवंबर से पहले बोनस, ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन...

By  Preeti Kamal April 14th 2026 03:45 PM -- Updated: April 14th 2026 03:23 PM

गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश: गौतम बुद्ध नगर की ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने मंगलवार को नोएडा में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद मज़दूरों के कल्याण के लिए कई उपायों की घोषणा की। उन्होंने मज़दूरों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि "हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है।" यहाँ पत्रकारों से बात करते हुए रूपम ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री और उच्च-स्तरीय समिति का धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने मज़दूरों की वेतन बढ़ाने की मुख्य माँग को मान लिया।"

इसके आगे उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने और भी निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि मज़दूरों का वेतन हर महीने की 10 तारीख से पहले उनके खातों में जमा हो जाए। हर साल नवंबर से पहले बोनस भी दिया जाएगा। ओवरटाइम काम के लिए दोगुना वेतन दिया जाएगा। साप्ताहिक छुट्टियों पर काम करने के लिए भी दोगुना वेतन दिया जाएगा।

ज़िलाधिकारी ने तुरंत कार्रवाई करने का दिया आश्वासन

ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि हर जगह यौन उत्पीड़न समितियाँ बनाई जाएँगी। इन समितियों की अध्यक्षता महिलाएँ करेंगी। शिकायत पेटियाँ भी उपलब्ध होंगी। मेरी सभी से अपील है कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। मैं सभी से आग्रह करती हूँ कि गौतम बुद्ध नगर में शांति और व्यवस्था बनाए रखें। कॉल सेंटर और कंट्रोल रूम के नंबर भी जारी कर दिए गए हैं। मज़दूर अपनी शिकायतें वहाँ भी दर्ज करा सकते हैं। हम इसकी निगरानी करेंगे, और हम तुरंत कार्रवाई करेंगे।

पुलिस ने शांति और व्यवस्था बनाए रखी

इसके अलावा, डीसीपी शैव्या गोयल ने कहा, "एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें बताया जा रहा है कि यही घटना तीन अलग-अलग जगहों पर हुई है। इस घटना में कुछ महिलाएं जो घरेलू कामगार के तौर पर काम करती हैं, वे वेतन बढ़ाने की मांग कर रही थीं। ये महिलाएं फैक्ट्री में काम करने वाली मज़दूर नहीं हैं। पुलिस मौके पर मौजूद है। शांति और व्यवस्था बनी हुई है।"

'एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई'

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव, शनमुगा सुंदरम एम.के. ने बताया था, "हमने श्रमिकों और उद्यमियों, दोनों से बात की... हमने लगभग दो घंटे तक विचार-मंथन किया और एक संतुलन बनाने की कोशिश की। क्योंकि सरकार हमेशा समावेशी होती है, जो समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखती है। मुख्यमंत्री ने भी निर्देश दिया है कि समिति को अपना काम करते समय समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखना चाहिए..."

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