अलीगंज अग्निकांड की जांच तेज, SIT गठित IAS अमृत अभिजात और IPS प्रवीण कुमार को जिम्मेदारी

15 मौतों वाले अलीगंज अग्निकांड की जांच के लिए गठित हुई दो सदस्यीय SIT, छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज; मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर चार अधिकारी निलंबित।

By  Laxman June 23rd 2026 12:56 PM

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद राज्य सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित इस दो सदस्यीय टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया 

मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि हादसे के कारणों, प्रशासनिक चूक और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की व्यापक जांच की जाएगी। एसआईटी में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की तह तक जाकर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

अनुभवी अधिकारियों के हाथों में जांच की कमान

अमृत अभिजात उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। बिहार के मुंगेर में जन्मे अमृत अभिजात प्रशासनिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं। वह आगरा, कानपुर नगर, मुजफ्फरनगर और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण जिलों के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अलावा प्रयागराज महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली है।

वहीं, 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार वर्तमान में लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से आने वाले प्रवीण कुमार को तेजतर्रार और परिणाम देने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। इंजीनियरिंग और विधि की पढ़ाई कर चुके प्रवीण कुमार ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।

छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

अलीगंज थाना पुलिस ने घटना के संबंध में अभियोग संख्या 115/2026 दर्ज किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125, 3(5) तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6 और 10 के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस ने मामले में छह आरोपियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों को नामजद किया है। अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

तीन अभियुक्त 

  1. रामकृष्ण उपाध्याय  पता MM 232 सेक्टर  D d अलीगंज  शिव  मंदिर के पास, 
  2. वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला पुत्र रामेश्वर प्रसाद शुक्ला पता 536/265 A मदेयगंज नियर बड़ा दुर्गा मंदिर सीतापुर रोड लखनऊ उम्र 62 वर्ष
  3. तूशॉक कृष्णा जायसवाल पुत्र स्वर्गीय कृष्ण कुमार जायसवाल पता 441 R N/ 69/3 नीलकंठ हॉस्पिटल लेन बालागंज लखनऊ थाना ठाकुरगंज उमर 31 वर्षको गिरफ्तार किया गया

सीएम के निर्देश पर चार अफसर तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए

  1. गौरव कुमार, एक्सईएन जानकीपुरम, बिजली विभाग 
  2. कमलेंद्र कुमार सिंह, अग्निशमन अधिकारी, इंदिरा नगर
  3. अनिल कुमार, AE लखनऊ विकास प्राधिकरण
  4. प्रमोद पांडे, JE लखनऊ विकास प्राधिकरण"

सरकार का मानना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना इस मामले को बंद नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि प्रशासनिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

फॉरेंसिक टीम जुटा रही सबूत

घटना के अगले दिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों की छह सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने जली हुई इमारत से साक्ष्य एकत्र किए और आग लगने के संभावित कारणों की जांच शुरू कर दी। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आग तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लगी।

एसआईटी और फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

हादसे के बाद इलाके के लोगों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रिहायशी क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कई लोगों ने अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा नियमों का पालन कराया गया होता तो इतने बड़े हादसे को रोका जा सकता था। लोगों ने प्रशासन से पूरे शहर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है।

मुख्यमंत्री ने रद्द किए सभी कार्यक्रम

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ का अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) पहुंचकर घायलों का हाल जाना।

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।

सात दिन में आएगी अहम रिपोर्ट

अब पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। सात दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि इस दर्दनाक हादसे के पीछे किन कारणों और किन लोगों की भूमिका थी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट के आधार पर और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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