राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 'भक्तों की संख्या पर कोई असर नहीं', बोले महंत दिनेंद्र दास
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही SIT का गठन कर चुकी है और जांच जारी है, इसलिए नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में वह आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है, बल्कि केवल जांच की प्रगति की जानकारी चाहता है।
अयोध्या, उत्तर प्रदेश: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने मंगलवार को कहा कि इन आरोपों का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है और दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। मीडिया से बातचीत में महंत दिनेंद्र दास ने कहा, "मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। भक्तों की संख्या में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई है।"
राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि अदालत का फैसला देश में शांति, प्रेम और सौहार्द बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, "जब सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा, तब देश में प्रेम और सौहार्द कायम रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बैरागी हैं और भगवान राम के भक्त हैं। यदि कोई गलती करता है तो वह तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई करते हैं।"
यूपी सरकार द्वारा गठित SIT की रिपोर्ट पेश करने का आदेश
यह बयान ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोपों की स्वतंत्र एवं न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को भी मामले की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT अपनी स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी। रिपोर्ट में SIT की संरचना (Composition) का भी उल्लेख किया जाए।" सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही SIT का गठन कर चुकी है और जांच जारी है, इसलिए नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
"अपनी ऊर्जा बचाकर रखिए, क्योंकि बाहर मीडिया के काम आएगा"
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में वह आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है, बल्कि केवल जांच की प्रगति की जानकारी चाहता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि SIT के गठन के 17 दिन बीत जाने के बावजूद जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "अपनी ऊर्जा बचाकर रखिए, क्योंकि बाहर मीडिया को बयान देने के लिए भी उसकी जरूरत पड़ेगी। क्या आप चाहते हैं कि हम कोई आदेश ही न दें?"
इसके बाद अदालत ने नोटिस जारी करते हुए SIT से उसकी प्रगति रिपोर्ट और टीम की संरचना का विवरण मांगा। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर चढ़ावे की राशि का गबन किया।