ईरान-अमेरिका समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम, भारत ने जताई उम्मीद

सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण दुनिया भर में आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुए और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ।

By  Preeti Kamal June 23rd 2026 11:29 AM

नई दिल्ली: भारत ने अमरीका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इस समझौते को लेकर "सतर्क आशावाद" व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लाभ मिल सकता है।

16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक को संबोधित करते हुए अजीत डोभाल ने कहा, "भारत अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU का स्वागत करता है। हमें इस समझौते को लेकर सतर्क आशावाद है और हमें उम्मीद है कि यह सफल होगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना बेहद स्वागतयोग्य कदम है।"

वॉशिंगटन-तेहरान के बीच आपसी समझ से हल होंगे मसले

अजीत डोभाल ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बनी समझ ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद करेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिलेगी।

इसके आगे उन्होंने आगे कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आवाजाही सुगम होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं भी कम होंगी। उन्होंने कहा, "इससे सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें दूर होंगी और उर्वरक, रसायन समेत कई क्षेत्रों में होने वाली कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।"

पश्चिम-एशिया के बीच संघर्ष विराम का पीएम मोदी ने किया था स्वागत 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि क्षेत्र और उससे बाहर के देशों के लिए समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही की सुविधा उपलब्ध होने से आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले 15 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता का स्वागत किया था। उन्होंने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने तथा समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।

'दोनों देशों के बीच हुए समझौते से हालात बेहतर होंगे'

सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण दुनिया भर में आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुए और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा, "भारत पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है। हमें उम्मीद है कि इस समझौते के क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।"

इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तकनीकी वार्ताओं को "बेहद उत्पादक 36 घंटे" बताया। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी से जुड़े मुद्दों पर हुई प्रगति को लेकर आशावाद व्यक्त किया।

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