ईरान का दावा: जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल हमला

IRGC के अनुसार, मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त अभियान में एयरबेस पर मौजूद C-RAM प्रारंभिक चेतावनी रडार प्रणाली और अमेरिकी सैनिकों के एकत्र होने वाले स्थान को निशाना बनाया गया। IRGC ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के लिए कुवैत की जमीन का इस्तेमाल किया।

By  Preeti Kamal July 16th 2026 11:45 AM -- Updated: July 16th 2026 11:07 AM

तेहरान, ईरान: ईरान ने गुरुवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, ये हमले हाल में ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों के जवाब में किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना 'ऑपरेशन लाइटनिंग (Operation Lightning)' चला रही है, जबकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) 'ऑपरेशन नसर-2 (Operation Nasr 2)' के तहत कार्रवाई कर रहा है। ईरानी सेना ने दावा किया कि ऑपरेशन लाइटनिंग के नौवें चरण में उसने जॉर्डन के अल-अजराक (Al-Azraq) एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य संचार प्रणाली, रडार और ईंधन टैंकों को विनाशकारी ड्रोन से निशाना बनाया।

'देश की रक्षा, खून का बदला लेने से सेना पीछे नहीं हटेगी'

सेना ने अल-अजराक एयरबेस को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना का एक प्रमुख रणनीतिक और कमांड सेंटर बताया। ईरानी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई अमरीका द्वारा ईरान के विभिन्न क्षेत्रों और बामपुर-ईरानशहर सैन्य ठिकाने पर किए गए हमलों के जवाब में की गई, जिनमें सेना के सात अधिकारी और जवान मारे गए। ईरानी सेना ने इरानशहर स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा की रक्षा और शहीदों के खून का बदला लेने से सेना पीछे नहीं हटेगी।

IRGC का दावा: कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर हमला

दूसरी ओर, IRGC ने अपने 15वें आधिकारिक बयान में दावा किया कि ऑपरेशन नसर-2 के आठवें चरण के तहत कुवैत स्थित अली अल-सलेम (Ali Al Salem) एयरबेस पर हमला किया गया। IRGC के अनुसार, मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त अभियान में एयरबेस पर मौजूद C-RAM प्रारंभिक चेतावनी रडार प्रणाली और अमेरिकी सैनिकों के एकत्र होने वाले स्थान को निशाना बनाया गया।

IRGC ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के लिए कुवैत की जमीन का इस्तेमाल किया। बयान में कुवैत की जनता से अपील करते हुए कहा गया कि वे अपने देश को "आक्रामक ताकतों" से मुक्त कराएं और अपनी ऐतिहासिक गरिमा की रक्षा करें।

CENTCOM का बयान

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने 15 जुलाई (अमेरिकी समयानुसार) रात 9 बजे ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले पूरे किए। CENTCOM के अनुसार, इन हमलों में कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं तथा तटीय निगरानी सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इसके लिए सटीक निर्देशित हथियारों (Precision-Guided Munitions) का इस्तेमाल किया गया।

अमेरिकी सेना ने कहा कि बंदर अब्बास सहित कई स्थानों पर कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिससे वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सके।

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