उत्तर कोरिया ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें, किम जोंग उन दुनिया को क्या संकेत दे रहे हैं ?
सियोल, दक्षिण कोरिया: शनिवार को उत्तर कोरिया ने 10 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। यह कदम उस समय उठाया गया जब कुछ दिन पहले दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हुआ है। उत्तर कोरिया इन सैन्य अभ्यासों को संभावित आक्रमण की तैयारी के रूप में देखता है।
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार मिसाइलें दोपहर करीब 1:20 बजे Pyongyang के पास से लॉन्च की गईं और लगभग 340 किलोमीटर की दूरी तय कर देश के पूर्वी तट के पास समुद्र में गिर गईं। मिसाइलों के गिरने से जापान भी सतर्क हो गया, क्योंकि वे बैलिस्टिक मिसाइलें जापान सागर में जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर गिरीं। आम तौर पर उत्तर कोरिया इस तरह के शक्ति प्रदर्शन के दौरान एक से तीन मिसाइलें दागता है, हालांकि मई 2024 में उसने 10 से अधिक मिसाइलों की बौछार भी की थी।
जापान के रक्षा मंत्री Shinjiro Koizumi ने अधिकारियों को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ समन्वय बनाते हुए स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने और सभी संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।
ट्रिगर: अमेरिका–दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास
यह मिसाइल प्रक्षेपण Freedom Shield नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास के बीच हुआ है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह अभ्यास उत्तर कोरिया से संभावित खतरे के खिलाफ तैयारियों को परखने के लिए किया जाता है। हालांकि उत्तर कोरिया इसे उकसाने वाली कार्रवाई मानता है और इसे अपने खिलाफ आक्रमण की रिहर्सल बताता है।
इसी सप्ताह उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग (Kim Yo Jong) ने चेतावनी दी थी कि ये सैन्य अभ्यास “अकल्पनीय रूप से भयानक परिणाम” ला सकते हैं। दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार 27 जनवरी को दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद यह उत्तर कोरिया का पहला बड़ा मिसाइल परीक्षण है।
ट्रंप के साथ कूटनीति पर संकेत
यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक संकेत फिर उभरते दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री Kim Min-seok, जो इस सप्ताह वॉशिंगटन के दौरे पर थे, उन्होंने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ बातचीत फिर शुरू करने के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है।
दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी Yonhap News Agency के अनुसार ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इस महीने Beijing में चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान किम जोंग उन से मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। गौरतलब है कि ट्रंप और किम जोंग उन 2018 से 2019 के बीच तीन बार मिल चुके हैं, लेकिन प्रतिबंधों में राहत और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के मुद्दे पर मतभेद के कारण वार्ता अंततः टूट गई थी।
परमाणु कार्यक्रम बना मुख्य मुद्दा
उत्तर कोरिया कई दशकों से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों का विकास कर रहा है और हाल के वर्षों में उसने दर्जनों मिसाइल परीक्षण किए हैं। इसी कारण 2006 से उस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। हाल ही में किम जोंग उन ने कहा था कि प्योंगयांग और वॉशिंगटन के बीच संबंध बेहतर हो सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह अमेरिका के रवैये पर निर्भर करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका टकराव का रास्ता चुनता है तो उत्तर कोरिया भी उसी के अनुरूप जवाबी कदम उठाएगा।