पाकिस्तान में 8.5 अरब रुपये के भ्रष्टाचार मामले में शीर्ष नौकरशाह जेल भेजा गया...

सुनवाई के दौरान एसीई की संयुक्त जांच टीम (सीआईटी) के एक सदस्य ने अदालत को बताया कि बिना किसी बैंक गारंटी के करोड़ों रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई, जिससे सरकारी धन को गंभीर जोखिम में डाला गया।

By  Preeti Kamal July 5th 2026 08:20 PM -- Updated: July 5th 2026 07:36 PM

कराची, पाकिस्तान: पाकिस्तान की सरकारी व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने वाले कराची मोबिलिटी प्रोजेक्ट (केएमपी) की बीआरटी येलो लाइन से जुड़े 8.5 अरब पाकिस्तानी रुपये के कथित भ्रष्टाचार मामले में मुख्य आरोपी ज़मीर अब्बासी ने गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए प्रांतीय भ्रष्टाचार निरोधक अदालत का रुख किया है।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अभियोजन पक्ष और मामले के जांच अधिकारी (आईओ) को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 11 जुलाई तय की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य आरोपी ज़मीर अब्बासी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश भी दिया।

 ज़मीर अब्बासी के खिलाफ मामला दर्ज

यह बहु-अरब रुपये का कथित गबन मामला तब दर्ज किया गया, जब सिंध एंटी करप्शन एस्टैब्लिशमेंट (एसीई) ने ग्रेड-19 के वरिष्ठ प्रांतीय अधिकारी और कराची मोबिलिटी प्रोजेक्ट के तत्कालीन परियोजना निदेशक ज़मीर अब्बासी के खिलाफ मामला दर्ज किया।

जांच में तत्कालीन खरीद निदेशक झमन दास सहित कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री निरीक्षण, जांच एवं कार्यान्वयन टीम विभाग (सीएमआईई एंड आईटीडी) की जांच के बाद हुई, जिसमें परियोजना में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।

बिना किसी बैंक गारंटी के करोड़ों रुपये के भुगतान हुए

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर शेर ज़मान ने शारीरिक रिमांड समाप्त होने के बाद ज़मीर अब्बासी को अदालत में पेश करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। सुनवाई के दौरान एसीई की संयुक्त जांच टीम (सीआईटी) के एक सदस्य ने अदालत को बताया कि बिना किसी बैंक गारंटी के करोड़ों रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई, जिससे सरकारी धन को गंभीर जोखिम में डाला गया।

ज़मीर अब्बासी को 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने ज़मीर अब्बासी को 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। साथ ही जेल प्रशासन को अगली सुनवाई में उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश करने का निर्देश दिया गया।

डॉन के अनुसार, मामले में पाकिस्तान दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 477-ए और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और खातों में हेराफेरी जैसे आरोप शामिल हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 की धारा 5(2) भी लगाई गई है।

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