ईरान पर हमले की आहट: अमेरिकी विदेश मंत्री और नेतन्याहू की मुलाकात पर टिकी दुनिया की निगाहें

By  GTC Bharat February 19th 2026 07:37 PM

पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) अगले सप्ताह इजरायल का दौरा कर सकते हैं, जहाँ वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और हालिया जिनेवा वार्ता के अपडेट पर चर्चा करना है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे एक कूटनीतिक दौरा बताया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है। अमेरिका ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

क्षेत्र में सैन्य हलचल ने "सप्ताह के अंत तक हमले" की चर्चाओं को हवा दे दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाते हुए 50 से अधिक उन्नत फाइटर जेट (F-22 और F-35) और दो विमानवाहक पोत (USS Abraham Lincoln और USS Gerald Ford) तैनात कर दिए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कारोलिन लेविट ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि ईरान के लिए बेहतर होगा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कोई समझौता कर ले, क्योंकि सैन्य विकल्प अब पहले से कहीं अधिक सक्रियता से विचाराधीन हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना को "ऑपरेशनल रूप से तैयार" रहने का निर्देश दिया गया है, जिससे इस बात की आशंका बढ़ गई है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो सप्ताहांत तक कोई बड़ा धमाका हो सकता है।

ईरान की ओर से भी इस तनाव पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अमेरिकी मांगों को "मनोवैज्ञानिक युद्ध" करार देते हुए खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। इस बीच, ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। खाड़ी के पड़ोसी देशों ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और पूरा क्षेत्र एक अंतहीन संघर्ष की आग में झुलस सकता है। दुनिया भर के शेयर बाजारों और निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी विदेश मंत्री की इजरायल यात्रा और उसके बाद आने वाले बयानों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि यह संकट शांतिपूर्ण समाधान की ओर जाएगा या युद्ध की ओर।

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