नई दिल्ली, भारत: केंद्र सरकार ने घरेलू कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए 1 जून 2026 से कपास (कॉटन) के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को पांच महीने के लिए पूरी तरह माफ कर दिया है। यह छूट 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। वित्त मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, आयातित कपास पर लगने वाली मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (Agriculture Infrastructure and Development Cess - AIDC) दोनों को पूरी तरह से छूट दी गई है।

सरकार ने कहा कि यह कदम भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने और उद्योग की कच्चे माल की लागत को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, "भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह अस्थायी छूट दी गई है।"

इस अस्थायी ड्यूटी छूट से कच्चे माल की लागत कम होगी

मंत्रालय ने बताया कि इस अस्थायी ड्यूटी छूट से टेक्सटाइल और परिधान (Apparel) उद्योग की पूरी वैल्यू चेन में कच्चे माल की लागत कम होगी, जिससे निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलेगी। साथ ही घरेलू किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से देश के वस्त्र उद्योग, विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs/MSMEs), को फायदा होगा क्योंकि वे स्थिर और पर्याप्त कपास आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर हैं।

लंबे समय से आयात शुल्क में राहत की मांग होती रही है

अधिसूचना राजस्व विभाग द्वारा सीमा शुल्क अधिनियम 1962 और वित्त अधिनियम 2021 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए जारी की गई है। सरकार ने कहा कि यह निर्णय जनहित में लिया गया है। भारत का टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र देश के सबसे बड़े विनिर्माण उद्योगों में से एक है और कपास का प्रमुख उपभोक्ता भी है। घरेलू आपूर्ति में कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के दौरान उद्योग लंबे समय से आयात शुल्क में राहत की मांग करता रहा है।