RBI ने FY 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% किया, वहीं GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% किया गया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताजनक तस्वीर पेश की है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई (Inflation) का अनुमान बढ़ाते हुए 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। RBI के इस संशोधित आकलन ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की चुनौतियों का असर दिखाई दे सकता है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान कहा कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में जारी युद्ध, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में व्यवधान, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और संभावित अल नीनो प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
महंगाई क्यों बढ़ सकती है?
केंद्रीय बैंक के अनुसार पिछले कुछ महीनों तक खुदरा महंगाई दर RBI के लक्ष्य दायरे में बनी रही। फरवरी 2026 में महंगाई 3.2 प्रतिशत, मार्च में 3.4 प्रतिशत और अप्रैल में 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके बावजूद भविष्य के लिए जोखिम बढ़ गए हैं।
RBI का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाएं और भू-राजनीतिक तनाव वस्तुओं की लागत को बढ़ा सकते हैं। इसका सीधा असर भारत में ईंधन, परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान
- जून 2026 तिमाही: 4.2%
- सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%
- दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%
- मार्च 2027 तिमाही: 5.4%
इन आंकड़ों से साफ है कि साल के दूसरे और तीसरे हिस्से में महंगाई दबाव बढ़ने की आशंका है।
तेल की कीमतें बढ़ा रहीं चिंता
RBI ने बताया कि भारतीय बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। यदि यह स्तर लंबे समय तक कायम रहता है तो पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत में और बढ़ोतरी हो सकती है।
ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च बढ़ता है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ता तक पहुंचता है। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने अपने महंगाई अनुमान में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है।
अल नीनो का कृषि पर असर
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस वर्ष अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की संभावना जताई है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले भारत में कमजोर मानसून का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। यदि उत्पादन घटता है तो खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण आय और उपभोग दोनों प्रभावित होने की आशंका रहती है।
GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती
महंगाई के साथ-साथ RBI ने आर्थिक विकास दर का अनुमान भी घटा दिया है। पहले वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जिसे अब घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन संकट और ऊर्जा कीमतों में तेजी का असर निवेश, उत्पादन और उपभोग पर पड़ सकता है।
तिमाहीवार GDP अनुमान
- जून 2026 तिमाही: 6.6%
- सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%
- दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%
- मार्च 2027 तिमाही: 6.8%
हालांकि RBI का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगी, लेकिन चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
यदि महंगाई बढ़ती है तो खाद्य पदार्थों, ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने से रोजगार और निवेश गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है।
RBI की ताजा रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत के सामने आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों मोर्चों पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। युद्ध, तेल संकट, वैश्विक अनिश्चितता और अल नीनो जैसे कारक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों को संतुलित नीतियों के जरिए विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
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