केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े एक अहम बदलाव को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 16 सितंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में EPF Wage Ceiling को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने का फैसला लिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए इसकी घोषणा की।
मौजूदा व्यवस्था में ₹15,000 तक की पात्र मासिक वेतन सीमा वाले कर्मचारियों के लिए EPF और EPS कवरेज का प्रावधान लागू होता है। नई सीमा बढ़ने के बाद ₹15,000 से ₹25,000 के बीच आने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में आ सकता है।
▪️#Cabinet approves enhancement of EPFO wage ceiling from Rs.15,000 to Rs.25,000 per month.▪️The decision is expected to bring more than 51 lakh additional employees within the ambit of mandatory EPFO coverage.▪️The annual Government outgo is estimated at about Rs.11,339… pic.twitter.com/Tx7jR0O2n7
— PIB India (@PIB_India) September 16, 2026
EPF और EPS का कवरेज होगा व्यापक
EPF यानी Employees' Provident Fund कर्मचारियों के लिए लंबे समय की बचत और रिटायरमेंट फंड तैयार करने की व्यवस्था है। वहीं EPS यानी Employees' Pension Scheme के जरिए पात्र कर्मचारियों को पेंशन से जुड़ा सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलता है।
वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों तक इन योजनाओं की पहुंच बढ़ाना है, जो मौजूदा ₹15,000 की सीमा के कारण अनिवार्य कवरेज से बाहर रह जाते थे। सरकार के इस फैसले से औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ सकता है।
कर्मचारियों की Retirement Saving पर क्या असर होगा?
EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान होता है। वेतन सीमा बढ़ने से पात्रता का दायरा बढ़ने पर नए कर्मचारियों के PF खातों में नियमित योगदान शुरू हो सकता है। इससे लंबी अवधि में रिटायरमेंट के लिए बचत बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी कर्मचारी के Take-home Salary, PF contribution और pension benefit पर वास्तविक असर उसकी पात्र वेतन संरचना और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ वेतन सीमा बढ़ने को सीधे तौर पर सभी कर्मचारियों की पेंशन में समान वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
12 साल बाद बढ़ी EPF Wage Ceiling
EPF की मौजूदा ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा लंबे समय से लागू थी। इससे पहले 2026 में भी इस सीमा को बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई थी। उस समय रिपोर्टों में ₹25,000 की प्रस्तावित सीमा का उल्लेख किया गया था और अंतिम मंजूरी कैबिनेट से मिलने की बात कही गई थी।
अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस बदलाव को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नई व्यवस्था की प्रभावी तारीख और इससे जुड़े विस्तृत अनुपालन नियमों की जानकारी सरकार और EPFO की ओर से सामने आने पर कर्मचारियों और नियोक्ताओं को उसके अनुसार अपने रिकॉर्ड और payroll व्यवस्था में बदलाव करना होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
EPFO देश में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। वेतन सीमा बढ़ने का सीधा उद्देश्य ज्यादा कर्मचारियों को PF और pension-linked social security framework से जोड़ना है।
सरकार के इस फैसले से खासकर उन कर्मचारियों को फायदा हो सकता है जिनकी पात्र वेतन राशि पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर होने के कारण अनिवार्य कवरेज से बाहर थी। हालांकि अंतिम लाभ कर्मचारी की वेतन संरचना और लागू EPFO नियमों के आधार पर तय होगा।
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