Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर देशभर में तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। मंदिरों में सजावट से लेकर घरों में कान्हा के श्रृंगार तक, बाजारों में भी त्योहार का असर साफ दिखाई दे रहा है। माखन-मिश्री, दूध-दही, मिठाई, फल, फूल-मालाओं और पूजा सामग्री के साथ लड्डू गोपाल की मूर्तियों, झूलों, मोर-मुकुट, बांसुरी और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी तेज हो गई है।
इसी बीच कारोबारी संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस साल जन्माष्टमी से जुड़े कारोबार को लेकर बड़ा अनुमान जारी किया है। संगठन के मुताबिक, 2026 में जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की संभावना है। यह अनुमान अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों में संभावित बिक्री, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन, मंदिरों से जुड़ी गतिविधियों और त्योहार के दौरान होने वाले अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर लगाया गया है।
हालांकि, यह आंकड़ा CAIT का अनुमान है, वास्तविक बिक्री इससे अलग हो सकती है।
सिर्फ पूजा नहीं, बड़े आर्थिक बाजार का मौका भी
जन्माष्टमी भारत के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में शामिल है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ घरों और मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। कई जगहों पर झांकियां, धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। यही वजह है कि त्योहार का असर केवल पूजा सामग्री तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे कई अलग-अलग कारोबार जुड़े होते हैं।
CAIT का कहना है कि जन्माष्टमी जैसे त्योहार भारत की ‘सनातन इकोनॉमी’ की ताकत को दिखाते हैं। धार्मिक आस्था के साथ होने वाली खरीदारी से किसानों, दूध उत्पादकों, फूल विक्रेताओं, मिठाई कारोबारियों, कारीगरों, मूर्तिकारों, कपड़ा व्यापारियों और परिवहन से जुड़े कारोबारियों तक आर्थिक गतिविधि पहुंचती है।
लंबे वीकेंड के कारण इस बार बड़ी संख्या में लोगों के मथुरा-वृंदावन, द्वारका और भगवान कृष्ण से जुड़े दूसरे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने की संभावना भी जताई गई है। इससे होटल, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट, स्थानीय बाजार और पर्यटन से जुड़े कारोबार को फायदा मिलने का अनुमान है।
सबसे ज्यादा खर्च मिठाई और डेयरी उत्पादों पर
CAIT के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी के कारोबार में सबसे बड़ा हिस्सा मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पादों का हो सकता है। संगठन के मुताबिक कुल संभावित कारोबार में इस श्रेणी की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत रह सकती है।
भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और माखन से जुड़े धार्मिक महत्व के कारण जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और दूसरी डेयरी चीजों की मांग बढ़ जाती है। इसके साथ ही घरों और मंदिरों में प्रसाद के लिए मिठाइयों की खरीदारी भी बड़े पैमाने पर होती है।
यानी CAIT के अनुमान के मुताबिक, 40,000 करोड़ रुपये के संभावित कारोबार में करीब एक-पांचवां हिस्सा इसी क्षेत्र से आ सकता है।

धार्मिक पर्यटन पर भी होगा बड़ा खर्च
जन्माष्टमी पर होने वाले कुल खर्च में धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा समेत कई कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और इंदौर जैसे शहरों में भी बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं।
श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने का सीधा असर बस, ट्रेन, टैक्सी और दूसरे परिवहन साधनों पर पड़ सकता है। वहीं धार्मिक शहरों में होटल, धर्मशाला, रेस्तरां और स्थानीय दुकानों के कारोबार में भी तेजी आने की संभावना है।

फूल और सजावट के सामान की भी बढ़ेगी मांग
जन्माष्टमी के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। इसी वजह से फूल, मालाओं और सजावट सामग्री की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
फूलों के अलावा बंदनवार, सजावटी सामान और पूजा स्थल को आकर्षक बनाने वाली चीजों की खरीदारी भी त्योहार से पहले बढ़ जाती है। इसका लाभ फूल उत्पादकों, स्थानीय विक्रेताओं और सजावट का सामान बनाने वाले छोटे कारोबारियों को मिल सकता है।

पूजा सामग्री पर भी खूब खर्च
जन्माष्टमी के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पूजा सामग्री की मांग भी बढ़ती है। CAIT के अनुमान में पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट का हिस्सा करीब 10 प्रतिशत बताया गया है।
त्योहार के दौरान श्रद्धालु पूजा के लिए अलग से सामग्री खरीदते हैं। कई बाजारों में तैयार पूजन किट भी उपलब्ध होती हैं, जिससे ग्राहकों के लिए जरूरी सामान एक ही जगह मिल जाता है।

पारंपरिक कपड़े और कान्हा का श्रृंगार
जन्माष्टमी केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती। इस अवसर पर लोग भगवान कृष्ण की मूर्तियों और लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार भी करते हैं। बच्चों और परिवार के सदस्यों के लिए पारंपरिक कपड़ों की खरीदारी भी होती है।
CAIT के आकलन के मुताबिक पारंपरिक परिधान और वस्त्र कुल कारोबार में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रख सकते हैं। इसके अलावा लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मोर-मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषण, विशेष पोशाक और दूसरी सजावटी चीजें भी इस दौरान बाजार में खूब बिकती हैं।

फल, मेवा और प्रसाद की खरीदारी
जन्माष्टमी पर पूजा और प्रसाद के लिए फलों तथा सूखे मेवों की खरीदारी भी बढ़ जाती है। CAIT ने इस श्रेणी की संभावित हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत बताई है।
फलों और मेवों के अलावा प्रसाद से जुड़ी दूसरी खाद्य सामग्री की मांग भी रहती है। इससे फल विक्रेताओं, ड्राई फ्रूट कारोबारियों और किराना कारोबार से जुड़े दुकानदारों को त्योहार की बिक्री का लाभ मिलने की संभावना है।
उपहार और घरेलू सजावट का भी हिस्सा
त्योहारों के दौरान परिवार और परिचितों के बीच उपहारों का लेन-देन भी होता है। बच्चों के लिए खिलौने और घरों की सजावट के सामान की खरीदारी भी जन्माष्टमी के बाजार का हिस्सा बनती है।
CAIT के अनुमान में उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामग्री की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत रहने की संभावना है। वहीं बाकी 10 प्रतिशत कारोबार अन्य उपभोक्ता वस्तुओं से आने का अनुमान है।

पिछले दो साल में भी बढ़ा कारोबार
CAIT के मुताबिक, जन्माष्टमी से जुड़ा कारोबार पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। संगठन का कहना है कि 2024 में करीब 25,000 करोड़ रुपये, जबकि 2025 में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था।
इस साल संगठन ने करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कारोबार के 40,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया है। इसके पीछे उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी, वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, धार्मिक पर्यटन का विस्तार और ऑनलाइन व आधुनिक रिटेल के बढ़ते इस्तेमाल जैसे कारण बताए गए हैं।
यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े CAIT द्वारा जारी अनुमान हैं, न कि किसी सरकारी एजेंसी की अंतिम बिक्री रिपोर्ट।
‘वोकल फॉर लोकल’ से छोटे कारोबारियों को फायदा
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने जन्माष्टमी को धार्मिक पर्व के साथ आर्थिक गतिविधियों का भी बड़ा अवसर बताया। उनके अनुसार, त्योहारों के दौरान स्थानीय और भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने से छोटे कारोबार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को फायदा पहुंच सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि त्योहारों के बाजार में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय व्यापार को मजबूती मिल रही है।
किसान से लेकर होटल कारोबारी तक जुड़े हैं
जन्माष्टमी के बाजार का दायरा काफी बड़ा है। दूध और डेयरी उत्पादों की मांग से दुग्ध उत्पादक जुड़े हैं तो फूलों की बिक्री से किसान और फूल विक्रेता। मिठाई की मांग से हलवाई और मिठाई कारोबारी जुड़े हैं, जबकि मूर्तियों और सजावटी सामान से कारीगरों एवं मूर्तिकारों को काम मिलता है।
इसी तरह कपड़ा व्यापारियों, महिला उद्यमियों, ट्रांसपोर्टरों, होटल संचालकों, रेस्तरां व्यवसायियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं को भी त्योहार के दौरान अतिरिक्त कारोबार मिलने की संभावना रहती है।
CAIT का तर्क है कि त्योहारों पर होने वाला खर्च सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं रहता। यह अलग-अलग क्षेत्रों में आय और रोजगार के अवसर पैदा करता है और छोटे कारोबारियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक आर्थिक गतिविधि को गति देता है।
मथुरा-वृंदावन से द्वारका तक दिखेगा असर
जन्माष्टमी के सबसे बड़े केंद्रों में मथुरा-वृंदावन का नाम प्रमुखता से आता है। इसके अलावा गुजरात का द्वारका, राजस्थान का नाथद्वारा और देश के दूसरे प्रमुख कृष्ण मंदिर भी इस दौरान श्रद्धालुओं से भरे रहने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बड़े स्तर पर आयोजन होने की बात कही गई है। ऐसे में स्थानीय बाजारों में पूजा सामग्री, फूल, प्रसाद, कपड़े, धार्मिक वस्तुओं और भोजन की मांग बढ़ सकती है।
भक्ति के साथ रोजगार और कारोबार का कनेक्शन
जन्माष्टमी के बहाने होने वाली यह खरीदारी दिखाती है कि भारत में धार्मिक त्योहारों का असर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। मंदिरों में होने वाले आयोजन से लेकर घरों की सजावट और धार्मिक यात्राओं तक, अलग-अलग स्तर पर कारोबार की एक लंबी श्रृंखला बनती है।
CAIT इसी पूरी प्रक्रिया को ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ के व्यापक स्वरूप से जोड़ता है। संगठन के मुताबिक, जन्माष्टमी जैसे त्योहारों में किसान, कारीगर, दुकानदार, परिवहन कारोबारी, होटल संचालक और उपभोक्ता एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
इस लिहाज से 2026 की जन्माष्टमी सिर्फ धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि बाजार के लिए भी एक बड़े सीजन के तौर पर सामने आ रही है। अगर CAIT का अनुमान सही रहता है, तो 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का संभावित कारोबार इस साल जन्माष्टमी को त्योहारों से जुड़े बड़े कारोबारी आयोजनों में शामिल कर सकता है।
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