बेत्रावती, नेपाल: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के नौ दिन बाद भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ऐसे में बेत्रावती के बोगटी तार गांव में एक परिवार ने अपने दो लापता सदस्यों के श्राद्ध और अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर दिए। परिवार का कहना है कि नौ दिनों तक तलाश के बावजूद दोनों भाइयों का कोई सुराग नहीं मिला। लापता दोनों भाइयों की पहचान केदार प्रसाद आचार्य (65) और मधुसूदन आचार्य (60) के रूप में हुई है। परिवार के अनुसार, दोनों 26 अगस्त की सुबह करीब 8 बजे नदी किनारे जंगल की ओर घास काटने गए थे। इसके बाद वे वापस घर नहीं लौटे।
परिवार ने आसपास के इलाकों और संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की, लेकिन दोनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। सरकारी स्तर पर बरामद शवों में भी दोनों भाइयों के होने की पुष्टि नहीं हुई। परिवार के एक सदस्य ने ANI से कहा कि उन्होंने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार ने दोनों को मृत मान लिया है, तो उन्होंने कहा कि हां, अब परिवार ने उनके निधन को स्वीकार कर लिया है।
‘नौ दिन इंतजार किया, लेकिन कुछ नहीं मिला’
परिवार के एक अन्य सदस्य ने बताया कि नौ दिनों तक वे अपने दोनों प्रियजनों के लौटने या उनके शव मिलने की उम्मीद करते रहे। उन्होंने कहा कि अब उन्हें लगता है कि शव शायद बह गए होंगे या समय बीतने के कारण उनका पता लगाना मुश्किल हो गया होगा। इसी वजह से परिवार ने हिंदू परंपराओं के अनुसार नौवें दिन से शोक और शुद्धिकरण से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान शुरू करने का फैसला किया।
परिवार के सदस्यों ने सिर मुंडवाने और अन्य पारंपरिक रस्में पूरी कीं। यह पूरा घटनाक्रम उन परिवारों की पीड़ा को सामने लाता है, जिन्हें अपने प्रियजनों के शव तक नसीब नहीं हुए, लेकिन धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के तहत उन्हें अंतिम विदाई की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है।
#WATCH | Betrawati, Nepal | Family members of brothers Kedar Prasad Acharya (65) and Madhusudan Acharya (60), have garlanded their photos, accepting their fate after they went missing following the devastating flash floods in Nepal. pic.twitter.com/YLqZ2dSE3K
— ANI (@ANI) September 3, 2026
नेपाल में अब भी 4,216 लोग लापता
नेपाल की National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 सितंबर तक बाढ़ और उससे जुड़ी आपदा में 1,204 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं। करीब 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है। राहत और खोज अभियान में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 21,314 जवान तैनात हैं। लापता लोगों में नेपाली नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक और पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे लोग भी शामिल हैं। रासुवा और नुवाकोट जैसे प्रभावित जिलों में बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के बाद भी खतरा बरकरार
26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के आसपास भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के पानी के साथ मलबा और बड़े पत्थर बहकर आए, जिससे बस्तियों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। 3 सितंबर को भी नेपाल के मौसम और बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने रासुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ के खतरे को लेकर चेतावनी दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बताया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका जताई गई है।
हजारों परिवारों के लिए इंतजार बना दर्द
नेपाल में बचाव दल लगातार नदी किनारों, बाढ़ प्रभावित बस्तियों, सड़कों और भूस्खलन वाले इलाकों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और दुर्गम इलाकों के कारण खोज अभियान में मुश्किलें बनी हुई हैं। आचार्य परिवार की तरह कई परिवार ऐसे हैं जो अपने लापता परिजनों की वापसी या उनके शव मिलने की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। कुछ परिवारों के लिए यह इंतजार अब धार्मिक शोक की रस्मों में बदल रहा है।
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