खुजदार, पाकिस्तान: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में लड़कियों की शिक्षा को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। जेहरी क्षेत्र के तरासानी गांव के निवासियों ने इलाके के एकमात्र सरकारी बालिका प्राथमिक विद्यालय के लंबे समय से प्रभावी रूप से बंद रहने के विरोध में प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण स्कूल में करीब एक साल से पढ़ाई ठप है।
The Balochistan Post की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल की इमारत अभी भी मौजूद है और छात्राएं हर सुबह किताबें व स्कूल बैग लेकर विद्यालय पहुंचती हैं। हालांकि, वहां पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते विद्यालय में शिक्षण गतिविधियां पूरी तरह बाधित हैं। स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों की बेटियों पर पड़ रहा है, जो अपनी बच्चियों को दूर स्थित दूसरे स्कूलों में भेजने में सक्षम नहीं हैं। उनके मुताबिक, स्थानीय विद्यालय ही आसपास की छात्राओं के लिए प्राथमिक शिक्षा का सबसे सुलभ माध्यम है।
शिक्षकों की कथित अनुपस्थिति पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल में नियुक्त शिक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को शिक्षकों की गैरहाजिरी की जानकारी दिए जाने के बावजूद विद्यालय को दोबारा संचालित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब सरकार बलूचिस्तान में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे कर रही है, तब दूरदराज के इलाकों में बच्चियों को प्राथमिक शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा भी क्यों नहीं मिल पा रही है।
Residents Protest Closure of Girls’ School in Zehrihttps://t.co/JOEEZPYLdE pic.twitter.com/UeBcwoMatm
— The Balochistan Post - English (@TBPEnglish) August 31, 2026
खुजदार में पहले भी सामने आ चुकी है शिक्षकों की कमी
खुजदार जिले में शिक्षकों की कमी और विद्यालयों के गैर-कार्यशील होने की समस्या पहले भी रिपोर्ट की गई है। अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जिले के कई इलाकों में शिक्षकों की कमी के कारण स्कूल प्रभावित हैं। रिपोर्ट में दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूलों तक पहुंच, शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे को शिक्षा व्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौतियां बताया गया था। जून 2026 में खुजदार के एक अन्य सरकारी बालिका हाई स्कूल को लेकर भी शिक्षा संबंधी समस्याएं सामने आई थीं। Baloch Literacy Campaign ने दावा किया था कि 200 से अधिक छात्राओं के लिए केवल छह से सात शिक्षक उपलब्ध थे और स्कूल में माध्यमिक स्तर की कक्षाएं भी संचालित नहीं हो रही थीं।
शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
तरासानी के ग्रामीणों और अभिभावकों ने बलूचिस्तान के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और खुजदार के जिला शिक्षा अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विद्यालय में नियुक्त शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और नियमित कक्षाएं जल्द शुरू कराई जाएं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की बड़ी संख्या में लड़कियां लंबे समय तक शिक्षा से वंचित रह सकती हैं।
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